ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

बिहार बाढ़: तीन महीने से पानी में घिरे गांवों की स्थिति कैसी है?
पश्चिमी चंपारण (बिहार) बाढ़ ने इस बार बिहार में भीषण तबाही मचाई है। ये ग्राउंड रिपोर्ट बिहार में पश्चिमी चंपारण के उन गांवों से हैं जहां तीन-तीन बार बाढ़ आई है पूरा इलाका सवा तीन महीन से पानी से घिरा है।

चूल्हा-चौका से खेती और कारोबार तक, अकोला की महिलाओं ने ऐसे बदली अपनी पहचान
महाराष्ट्र में अकोला जिले के राजंदा और पिलकवाड़ी गांव महिलाओं को कुछ साल पहले तक सिर्फ चूल्हा-चौका तक सीमित समझा जाता है, गांव के पुरुषों को लगता था कि, खेती महिलाओं के बस की बात नहीं हैं, लेकिन वही पुरुष आज खेती से लेकर हर बड़े फैसले में अब उनकी राय लेते हैं। महिलाएं अब खुद की कंपनी चला रही हैं।

जैविक कपास की खेती से क्यों मुंह मोड़ रहे मध्य प्रदेश के किसान?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कपास उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश में जैविक कपास का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों से लगातार घट रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जैविक कपास के लिए जरूरी गैर-बीटी बीजों की मांग के मुकाबले केवल 30–40% बीज उपलब्ध हैं।

हर साल बिहार में बाढ़ क्यों आती है? आखिर क्या है इसकी असली वजह
बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की असली वजह क्या है? यह खबर इसी सवाल का जवाब है।

बिजली का दावा और जमीनी हकीकत: ग्रामीण महिलाओं पर दोहरी मार
देश में लगभग हर घर तक बिजली पहुंचने के सरकारी दावों के बावजूद, ग्रामीण भारत के कई इलाकों में आज भी भरोसेमंद बिजली आपूर्ति एक चुनौती है। ग्रामीण भारत में 82.1% महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू काम करती हैं और रोजाना औसतन 301 मिनट इसमें बिताती हैं। ऐसे में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की कमी का सबसे बड़ा बोझ उन्हीं महिलाओं पर पड़ता है, जिनका अधिकांश समय घर के कामों में गुजरता है।

केन-बेतवा आंदोलन में बड़ा घटनाक्रम, अमित भटनागर ने 18 दिन बाद खत्म किया अनशन
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर 18 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने मां के आग्रह पर नारियल पानी पीकर उपवास तोड़ा।

'जल, जंगल और जमीन के लिए आदिवासियों की लड़ाई जारी रहेगी'
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा योजना से प्रभावित आदिवासियों का सत्याग्रह भले ही खत्म करवा दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मांगों पूरी न होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

भावनगर में बैंगन के दाम गिरे, किसान फसल खेतों में फेंकने को मजबूर
गुजरात के भावनगर में बैंगन की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को मंडियों में सिर्फ 3 से 5 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। कम कीमत के कारण उत्पादन लागत और परिवहन खर्च तक नहीं निकल पा रहा है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: छतरपुर में प्रशासन ने खत्म कराया सत्याग्रह, प्रदर्शनकारियों को अस्पताल भेजा
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में कई दिनों से चल रहा आदिवासियों का सत्याग्रह प्रशासन ने समाप्त करा दिया है।

MP के 'फांसी आंदोलन' की गूंज PMO तक, जानिए क्यों विरोध कर रहे हैं आदिवासी
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों का आंदोलन तेज हो गया है। उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए वे पिछले कई दिनों से धरना और अनशन कर रहे हैं। आंदोलन की गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचने के बाद केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: देश की 62.9% ग्रामीण महिलाएँ कृषि क्षेत्र में कार्यरत
नारी तू नारायणी – यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि हर महिला की शक्ति, समर्पण और योगदान का प्रतीक है. 8 मार्च 1917 को महिलाओं ने अपने हक की लड़ाई के लिए हड़ताल की थी. इसके बाद UN ने इसी दिन को ध्यान में र

किसान दिवस: जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक देश प्रगति नहीं करेगा
“जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक देश प्रगति नहीं करेगा।” ऐसा मानने वाले भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का आज जन्मदिवस है। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ था। उन्
