ग्राउन्ड रिपोर्ट्स

हर साल बिहार में बाढ़ क्यों आती है? आखिर क्या है इसकी असली वजह
बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की असली वजह क्या है? यह खबर इसी सवाल का जवाब है।

बिजली का दावा और जमीनी हकीकत: ग्रामीण महिलाओं पर दोहरी मार
देश में लगभग हर घर तक बिजली पहुंचने के सरकारी दावों के बावजूद, ग्रामीण भारत के कई इलाकों में आज भी भरोसेमंद बिजली आपूर्ति एक चुनौती है। ग्रामीण भारत में 82.1% महिलाएं बिना वेतन वाले घरेलू काम करती हैं और रोजाना औसतन 301 मिनट इसमें बिताती हैं। ऐसे में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की कमी का सबसे बड़ा बोझ उन्हीं महिलाओं पर पड़ता है, जिनका अधिकांश समय घर के कामों में गुजरता है।

केन-बेतवा आंदोलन में बड़ा घटनाक्रम, अमित भटनागर ने 18 दिन बाद खत्म किया अनशन
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर 18 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने मां के आग्रह पर नारियल पानी पीकर उपवास तोड़ा।

'जल, जंगल और जमीन के लिए आदिवासियों की लड़ाई जारी रहेगी'
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा योजना से प्रभावित आदिवासियों का सत्याग्रह भले ही खत्म करवा दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मांगों पूरी न होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

भावनगर में बैंगन के दाम गिरे, किसान फसल खेतों में फेंकने को मजबूर
गुजरात के भावनगर में बैंगन की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को मंडियों में सिर्फ 3 से 5 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। कम कीमत के कारण उत्पादन लागत और परिवहन खर्च तक नहीं निकल पा रहा है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: छतरपुर में प्रशासन ने खत्म कराया सत्याग्रह, प्रदर्शनकारियों को अस्पताल भेजा
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में कई दिनों से चल रहा आदिवासियों का सत्याग्रह प्रशासन ने समाप्त करा दिया है।

MP के 'फांसी आंदोलन' की गूंज PMO तक, जानिए क्यों विरोध कर रहे हैं आदिवासी
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों का आंदोलन तेज हो गया है। उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए वे पिछले कई दिनों से धरना और अनशन कर रहे हैं। आंदोलन की गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचने के बाद केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: देश की 62.9% ग्रामीण महिलाएँ कृषि क्षेत्र में कार्यरत
नारी तू नारायणी – यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि हर महिला की शक्ति, समर्पण और योगदान का प्रतीक है. 8 मार्च 1917 को महिलाओं ने अपने हक की लड़ाई के लिए हड़ताल की थी. इसके बाद UN ने इसी दिन को ध्यान में र

किसान दिवस: जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक देश प्रगति नहीं करेगा
“जब तक किसानों की स्थिति ठीक नहीं होगी, तब तक देश प्रगति नहीं करेगा।” ऐसा मानने वाले भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का आज जन्मदिवस है। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ था। उन्

World Food Day 2024: क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड फ़ूड डे, जानिए क्या है इसका महत्व?
वर्ल्ड फ़ूड डे हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और भुखमरी के मुद्दे के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साल 2024 की थीम "बेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए भोजन

कृषि-बजट: सरकार ने मारी बाजी या फिर चूक गए चौहान?
एक बार फिर सत्ता के गलियारों में किसानों की भलाई का जिक्र बड़े जोर-शोर से किया जा रहा है। जी हां केंद्र सरकार ने हाल ही में 13,966 करोड़ रुपये की सात योजनाओं का ऐलान किया, जिसका मकसद कथित तौर पर किसान

स्थाई कृषि (Sustainable Agriculture) तक पहुँचने के लिए क्यों आसान नहीं है भारत की राह?
अंतर्राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्रियों की 32वीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीरो एमिशन के लक्ष्य को हम पारंपरिक खेती के बजाय सस्टेनेबल फ़ार्मिंग (स्थाई कृषि) के जरिए पाया जा सकता है.
