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भारत-अमेरिका डील

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनशील फसलों और किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसान संगठनों और विपक्ष ने GM उत्पादों के “पिछले दरवाजे” से आने की आशंका जताई है, जबकि सरकार ने अपनी पुरानी GM नीति में कोई बदलाव न होने की बात कही है।

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राष्ट्रीय दलहन क्रांति

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए विशेष पैकेज, उन्नत बीज, सीड हब और बेहतर फसल बीमा की मांग की है।

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प्रीमियम सेगमेंट में बढ़ेगा भारतीय काजू

APEDA की पहल: प्रीमियम सेगमेंट में बढ़ेगा भारतीय काजू

एपीडा और IBEF मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘इंडियन काजू’ ब्रांड को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका लक्ष्य भुने, फ्लेवर और अन्य वैल्यू-ऐडेड काजू उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर बेहतर कीमत हासिल करना है। नए फ्री ट्रेड समझौतों से कई देशों में शून्य शुल्क पर निर्यात के मौके मिले हैं, जिससे भारत का काजू उद्योग वैश्विक बाजार में और मजबूत हो सकता है।

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India-US ट्रेड डील

India-US ट्रेड डील: किन अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिली भारत में entry?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क घटाएगा या सीमित मात्रा में आयात की अनुमति देगा, जबकि मांस, डेयरी, अनाज और अन्य संवेदनशील फसलों में घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं। अमेरिका भी कपड़ा, चमड़ा और अन्य भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाने को तैयार हुआ है। सरकार का कहना है कि यह समझौता संतुलित है, लेकिन विशेषज्ञ गैर-शुल्क बाधाओं में बदलाव पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।

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कृषि उत्पाद समझौते से बाहर,

कृषि उत्पाद समझौते से बाहर, किसानों को नहीं होगा नुकसान: कृषि मंत्री चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है और किसी भी अहम कृषि उत्पाद को इसमें शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने मांस, डेयरी, अनाज, दालें, फल-सब्जियां और मसालों समेत कई उत्पादों पर अमेरिका को कोई छूट नहीं दी है। उन्होंने कांग्रेस के “सरेंडर” वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता देशहित में संतुलित बातचीत से हुआ है।

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सरकारी गोदामों

गेहूं की आपूर्ति बढ़ी, सरकार ने स्टॉक लिमिट हटाई

केंद्र सरकार ने कीमतों पर नजर रखने और आने वाले त्योहारी सीजन से पहले गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लि‍हाज से 27 मई, 2025 को जारी गेहूं स्टॉक सीमा आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह फैसला घरेलू बाजारों में आरामदायक आपूर्ति…

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आठ करोड़ से ज्‍यादा को म‍िला पहचान पत्र, क‍िसानों के ल‍िए तकनीक पर जोर- श‍िवराज स‍िंंह

अब तक कुल आठ करोड़ 47 लाख से ज़्यादा किसान पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने 2026-27 तक देश में ग्यारह करोड़ किसानों के किसान आईडी बनाने का लक्ष्य रखा है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को बताया…

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यूपी को ₹9.14 लाख करोड़ का क्रेडिट रोडमैप

1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में यूपी को ₹9.14 लाख करोड़ का क्रेडिट रोडमैप

नाबार्ड ने वर्ष 2026–27 के लिए उत्तर प्रदेश में ₹9.14 लाख करोड़ की ऋण संभाव्यता का आकलन जारी किया है, जिसका विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य क्रेडिट संगोष्ठी में किया। इस मौके पर e-KCC पोर्टल लॉन्च किया गया, जिससे किसानों को 3–4 हफ्तों की जगह सिर्फ 5 मिनट में ऋण मिल सकेगा। कार्यक्रम में कृषि, एमएसएमई और सहकारिता क्षेत्रों में ऋण बढ़ाकर राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया।

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5 मिनट में मिलेगा ई-केसीसी ऋण

5 मिनट में मिलेगा ई-केसीसी से ऋण, डिजिटल गवर्नेंस से बदली तस्वीर: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के कारण अब किसानों को ई-केसीसी के जरिए सिर्फ 5 मिनट में ऋण मिल रहा है, जबकि पहले इसमें कई हफ्ते लगते थे। 2026-27 के लिए कृषि ऋण लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। सरकार एफपीओ, सहकारिता, एमएसएमई और ओडीओपी जैसी योजनाओं से किसानों और उद्यमियों को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने बैंकों से ऋण की शर्तें आसान करने और प्रशिक्षण व तकनीक के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।

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धान खेती का नया मॉडल

कम पानी, कम मजदूरी, ज्यादा उत्पादन: धान खेती का नया मॉडल

IRRI की स्टडी के मुताबिक, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) पर सही निवेश से भारत में जलवायु-अनुकूल धान खेती को बढ़ावा मिल सकता है। यह तरीका कम पानी और कम मजदूरी में खेती संभव बनाता है। नई DSR-अनुकूल धान किस्मों ने परीक्षण में करीब 15% ज्यादा पैदावार दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की लागत घटेगी, आय बढ़ेगी और पर्यावरण पर दबाव भी कम होगा।

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