पशुपालन

कम बारिश के कारण किसानों की बढ़ी परेशानी, बैलों को आश्रम में रखने को मजबूर किसान
किसानों का कहना है कि बैल उनके लिए केवल पशु नहीं, बल्कि खेती में वर्षों से साथ निभाने वाले साथी रहे हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में चारे, पानी और रखरखाव का बढ़ता खर्च वहन करना कठिन हो गया है।

नंदिनी दूध पर बड़ा फैसला, ₹8 तक बढ़ सकती है कीमत
दूध उत्पादक संघों ने पहले 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की मांग की थी। उनका कहना है कि पशु चारा, दवाइयों, परिवहन और पैकेजिंग का खर्च बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत बढ़ गई है। सूखे के कारण चारे की कमी ने डेयरी किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।

टूना मछली खाने से घबराने की जरूरत नहीं, ICAR-CMFRI ने बताया सुरक्षित
ICAR-CMFRI के मुताबिक, मछली को खाने से पहले उसकी सफाई और अंदरूनी हिस्से को ठीक से निकालना जरूरी है। मछली को अच्छी तरह साफ करने के बाद उसे सही तरीके से पकाना भी उतना ही जरूरी है।

बिहार के मछली पालकों के लिए बड़ी खबर, सीवान में बनेगा आधुनिक फिशरीज इंफ्रास्ट्रक्चर
NABARD के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत मछली पालन की यूनिट, मछली के बीज तैयार करने वाले सेंटर और हैचरी बनाए जाएंगे। इसके अलावा मछली की खरीद-बिक्री के लिए कलेक्शन और लैंडिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड-चेन की सुविधा भी विकसित की जाएगी।

मछली पालन को बढ़ावा देने वाली नई तकनीक, ICAR ने विकसित किया ‘OVAQUA’
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और दुनिया के कुल मछली उत्पादन में करीब 8 फीसदी योगदान देता है। मत्स्य क्षेत्र से देश में करीब 3 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।

लंपी बीमारी से पशुओं को कैसे बचाएं? जानिए लक्षण और बचाव के तरीके
लंपी के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 14 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं। पशु को तेज बुखार हो सकता है, जो 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा शरीर पर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें निकल सकती हैं और गर्दन की गांठों में सूजन आ सकती है।

IVF तकनीक से तैयार हुआ बद्री गाय का बछड़ा, देशी नस्ल को बचाने की कोशिश
वैज्ञानिक अब ज्यादा दूध देने वाली अच्छी बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रहे हैं। आगे IVF और क्लोनिंग से तैयार Embryo को अलग-अलग सरोगेट गायों में ट्रांसफर करने की योजना है।

डेयरी में साइलेज का इस्तेमाल क्यों है जरूरी? जानिए बनाने का तरीका और फायदे
साइलेज एक पोषण से भरपूर हरा चारा है, जिसे मक्का, ज्वार, बाजरा और हरी घास जैसी फसलों को fermentation के जरिए तैयार करके बनाया जाता है। इसमें सूखे चारे की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं और इसमें करीब 16-17 फीसदी तक प्रोटीन हो सकती है। यह पशुओं की सेहत के साथ-साथ दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है।

11 तालाबों से 36 टन थाई मांगुर नष्ट, जानिए इस मछली पर कब से है प्रतिबंध और क्यों होता है अवैध पालन
भारत में Clarias gariepinus के पालन पर 19 दिसंबर 1997 से रोक है। इसके बाद केंद्र के मत्स्य विभाग ने 10 जनवरी 2013 और 20 फरवरी 2019 के आदेशों के जरिए इस प्रतिबंध को फिर से स्पष्ट किया। वहीं 5 अप्रैल 2024 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी विदेशी कैटफिश और उसके हाइब्रिड के पालन और प्रजनन पर देशभर में रोक को स्पष्ट करते हुए मौजूद स्टॉक को नष्ट करने के निर्देश दिए।

बजट 2026-27 में पशुपालकों पर खास फोकस, निजी क्षेत्र में पशु-चिकित्सा को मिलेगा प्रोत्साहन
बजट 2026-27 में पशुपालकों के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। पशु-चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, पशु-चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाने और निजी क्षेत्र को सब्सिडी के जरिए प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया ह

दूध उत्पादन में नंबर वन, फिर भी पशुपालक परेशान क्यों?
भारत दूध उत्पादन में दुनिया में नंबर वन है, लेकिन प्रति पशु दूध कम और लागत ज्यादा है। NDDB के मुताबिक अगर पशुपालक वैज्ञानिक तरीके अपनाएं—जैसे सही चारा, अच्छी नस्ल, समय पर टीकाकरण, बछड़ा पालन और डिजिटल

सस्ता इलाज, बेहतर देखभाल: अब यूपी के हर ब्लॉक में पशु जन औषधि केंद्र
उत्तर प्रदेश में हर ब्लॉक में पशु जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे, जहां पशुपालकों को पशुओं के लिए सस्ती जेनेरिक दवाइयां मिलेंगी। ये केंद्र प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर काम करेंगे। इससे पशुओं के इ
