राजकोट। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में कम बारिश के कारण किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। बारिश की कमी के चलते पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की भारी किल्लत सामने आ रही है।
चारे और पानी की कमी के साथ-साथ खेती में बढ़ते मशीनीकरण और जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटने के कारण किसानों के लिए बैलों का पालन-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में कई किसान भारी मन से अपने वर्षों पुराने साथी बैलों को राजकोट के पास स्थित बैल आश्रम में रखने के लिए पहुंचा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि बैल उनके लिए केवल पशु नहीं, बल्कि खेती में वर्षों से साथ निभाने वाले साथी रहे हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में चारे, पानी और रखरखाव का बढ़ता खर्च वहन करना कठिन हो गया है।
खेती में ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों के बढ़ते उपयोग से बैलों पर निर्भरता भी कम हुई है। वहीं कम बारिश के कारण खेतों में चारा उपलब्ध नहीं हो रहा है। इन परिस्थितियों में किसान मजबूरी में अपने बैलों को आश्रम में छोड़ रहे हैं, ताकि उन्हें कम से कम पर्याप्त चारा और पानी मिल सके।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों और पशुपालकों को राहत मिल सके।

कम बारिश से चारे की किल्लत, किसान बैलों को आश्रम में रखने को मजबूर
सौराष्ट्र, राजकोट, द्वारका सहित आसपास के क्षेत्रों में इस वर्ष कम बारिश होने के कारण मूंगफली सहित कई फसलों को नुकसान हुआ है। चारे और पानी की कमी के चलते किसान अपने बैलों को आश्रम में रखने के लिए मजबूर हो गए हैं।
किसान समनभाई ने बताया, “बैलों को आश्रम में रखने का हमारा भी मन नहीं करता, लेकिन चारा उपलब्ध नहीं होने के कारण भारी मन से अपने बैलों को आश्रम में छोड़कर आना पड़ रहा है।”
(रिपोर्ट: हर्षदीप चारडिया, भावनगर)





