मछली पालन अब सिर्फ तालाब में मछली डालकर पालने तक सीमित नहीं है। बेहतर Fish Seed, वैज्ञानिक प्रजनन, नई तकनीक और सही प्रबंधन के जरिए किसान कम समय में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दिशा में ICAR-Central Institute of Coldwater Fisheries Research (CICFR), भीमताल ने मछलियों में कृत्रिम प्रजनन यानी Induced Breeding के लिए ‘OVAQUA’ नाम का कम लागत वाला GnRH आधारित हार्मोन फॉर्मूलेशन विकसित किया है। ICAR के मुताबिक, इसे अलग-अलग जगहों और मछली प्रजातियों में आजमाया गया है और इससे स्पॉनिंग, फर्टिलाइजेशन और हैचिंग में अच्छे नतीजे मिले हैं।
क्या है OVAQUA और कैसे करेगा मदद?
मछली पालन में अच्छी गुणवत्ता का बीज मिलना बहुत जरूरी है। कई मछलियां प्राकृतिक रूप से हर मौसम में या नियंत्रित परिस्थितियों में आसानी से प्रजनन नहीं करतीं। ऐसे में Induced Breeding तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें हार्मोन की मदद से मछली में प्रजनन की प्रक्रिया को प्रेरित किया जाता है।
ICAR-CICFR ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए OVAQUA विकसित किया है। यह एक GnRH injectable formulation है। ICAR के अनुसार, इसकी खासियत यह है कि यह कम चिपचिपा यानी less viscous है, इसलिए इसे इंजेक्ट करना आसान है। संस्थान के परीक्षणों में इस फॉर्मूलेशन ने अलग-अलग मछली प्रजातियों में स्पॉनिंग कराने में अच्छा प्रदर्शन किया।
रोहू, कतला और मृगल में हुआ परीक्षण
ICAR-CICFR की 2023 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, OVAQUA का उत्तराखंड में रोहू, कतला और मृगल, जबकि असम और गुजरात में रोहू और कतला जैसी मछलियों पर फील्ड ट्रायल किया गया। मणिपुर में भी इसका परीक्षण Bangana dero पर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन परीक्षणों में OVAQUA से मछलियों में सफलतापूर्वक स्पॉनिंग कराई गई और किसी भी परीक्षण में इंजेक्शन दी गई मछलियों की मृत्यु नहीं हुई।
मछली पालन क्यों है किसानों के लिए अहम?
मछली पालन किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी और रोजगार का बड़ा जरिया बन रहा है। खासकर तालाब, जलाशय और दूसरी जलस्रोत वाली जगहों पर किसान इसे खेती के साथ जोड़कर अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं। सरकार भी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के जरिए मछली उत्पादन, एक्वाकल्चर, हैचरी, फीड, कोल्ड स्टोरेज, मार्केटिंग और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।
भारत में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल मछली उत्पादन 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है। इसमें Inland Fisheries और Aquaculture की बड़ी भूमिका है। 2024-25 में इनसे करीब 151.60 लाख टन मछली उत्पादन हुआ, जबकि समुद्री मत्स्य उत्पादन करीब 46.15 लाख टन रहा।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और दुनिया के कुल मछली उत्पादन में करीब 8 फीसदी योगदान देता है। मत्स्य क्षेत्र से देश में करीब 3 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।
मछली की खपत भी बढ़ी
देश में मछली की उपलब्धता बढ़ने के साथ इसकी घरेलू खपत भी बढ़ी है। PIB के मुताबिक, प्रति व्यक्ति मछली खपत 5-6 किलो से बढ़कर करीब 12-13 किलो हो गई है। यानी देश में मछली की मांग लगातार बढ़ रही है और इससे मछली पालकों के लिए बाजार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
मछली निर्यात में भी भारत की मजबूत पकड़
मछली और दूसरे समुद्री उत्पाद भारत के लिए विदेशी कमाई का भी बड़ा जरिया हैं। 2024-25 में भारत का fisheries export करीब ₹62,408 करोड़ रहा। वहीं, सितंबर 2026 में PIB के मुताबिक, 2025-26 में fisheries exports बढ़कर ₹73,890 करोड़ पहुंच गए। भारत खास तौर पर झींगा यानी shrimp export के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।
तकनीक से मजबूत होगा मछली पालन
मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए सिर्फ ज्यादा तालाब बनाना ही काफी नहीं है। अच्छा Fish Seed, वैज्ञानिक प्रजनन, बेहतर Feed, पानी की गुणवत्ता, आधुनिक पालन तकनीक और मजबूत बाजार व्यवस्था भी जरूरी है। OVAQUA जैसी तकनीक इसी पूरी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है, क्योंकि बेहतर और नियंत्रित बीज उत्पादन से आगे की मछली पालन प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है। ICAR-CICFR भारत में ठंडे पानी वाली मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर पर काम करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है।





