गुजरात के भावनगर जिले में बैंगन की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है। मंडियों में बैंगन का भाव महज 3 से 5 रुपये प्रति किलो रह गया है। ऐसे में किसानों के लिए फसल बेचना भी घाटे का सौदा बन गया है। कई किसान बैंगन को मंडी ले जाने के बजाय खेतों में ही फेंककर नष्ट करने को मजबूर हैं।
लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों में मजदूरी, परिवहन और उत्पादन लागत तक निकालना मुश्किल हो गया है। खेती की जुताई, बुवाई, खाद, दवाइयां, सिंचाई और अन्य खर्चों को मिलाकर एक बीघा में करीब 10 से 15 हजार रुपये की लागत आती है। सामान्य परिस्थितियों में एक बीघा से 50 हजार रुपये से अधिक की आमदनी हो सकती है, लेकिन इस बार दाम गिरने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान बोले- मंडी ले जाना भी घाटे का सौदा
किसान राजुभाई सोलंकी ने बताया कि उन्होंने ढाई बीघा में बैंगन की खेती की है। इस बार फसल अच्छी हुई, लेकिन मंडी में भाव केवल 3 से 5 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। उनका कहना है कि इतनी कीमत पर बिक्री करने से मजदूरी का खर्च भी नहीं निकलता। इसी वजह से वे अब तक 100 मन से ज्यादा बैंगन खेत के बाहर फेंक चुके हैं और फसल उखाड़ना भी शुरू कर दिया है।
पहले 30 रुपये किलो था भाव
एक अन्य किसान मनुभाई ने बताया कि जब इस सीजन में बैंगन की आवक शुरू हुई थी, तब इसका भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो था। लेकिन अब कीमत घटकर करीब 3 रुपये प्रति किलो रह गई है। ऐसे में फसल को मंडी तक पहुंचाने का किराया निकालना भी मुश्किल हो गया है। इसी कारण कई किसान बैंगन तोड़कर खेतों में ही नष्ट कर रहे हैं।
किसानों ने की उचित दाम की मांग
किसानों का कहना है कि यदि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिला तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने की मांग की है।





