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तकनीक से तरक्की

कांच की बोतल या पैकट में आने वाला दूध कैसे होता है पैक और पाश्चराइज्ड

एक साथ 40 गायों का दूध नहीं निकाला जा सकता हैं 500 गायों के दूध निकालने में लगभग 2 से ढ़ाई घण्टे लगते हैं। दूध की लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता दूध पाश्चुराइज, सूक्ष्म वैक्टीरिया मर जाते है और दूध को ज

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Ashish·Correspondent·13 May 2023· 5 min read

कांच की बोतल या पैकट में आने वाला दूध कैसे होता है पैक और पाश्चराइज्ड

कांच की बोतल या पैकट में आने वाला दूध कैसे होता है पैक और पाश्चराइज्ड

एक साथ 40 गायों का दूध नहीं निकाला जा सकता हैं 500 गायों के दूध निकालने में लगभग 2 से ढ़ाई घण्टे लगते हैं। दूध की लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता दूध पाश्चुराइज, सूक्ष्म वैक्टीरिया मर जाते है और दूध को जल्दी खट्टा या फटने से बचाया जा सकता है।

हमारे आपके घरों में जो पैकेट या कांच की बोतल वाला दूध आता है वो मॉडर्न तकनीकी के जरिए गाय-भैंसे से दुहा कैसे जाता है? कैसे उसकी पैकिंग होती है? क्या होती है पूरी प्रोसेज। वो जो पशुपालक हैं, डेयरी चलाते हैं या फिर इस सेक्टर में रोजगार को शुरु करने की तैयारी में है। यहां पूरी प्रोसेज को आसानी से सरल शब्दों में समझ सकते हैं।

बिनसर डेयरी फॉर्म जिसे दीपक राज ने विपरो की नोकरी छोड़कर शुरू किया। बिनसर डेयरी फॉर्म दिल्ली-हरियाणा के बार्डर पर स्थित एक मीडियम रेंज का हाईटेक डेयरी फार्म हैं, यहां ज्यादातार काम मशीनों से होते हैं। बिनसर फार्म में 500 से ज्यादा HF, जर्सी गाय हैं। बिनसर फॉर्म में ज्यादातर काम मशीनों से लिया जाता है और यही पर है डेयरी फार्म का मिल्किंग पार्लर यानि वो जगह जहां दूध निकाला जाता है, मिल्किंग का काम भी मशीन से होता है।

चारा देने के बाद गायों को इस मिल्किंग पार्लर में लाया जाता है, जहां सबसे पहले उनकी अच्छे से साफ सफाई की जाती है और उनके अयन और थनों को धुला जाता है। सफाई पर बेहद ध्यान देना चाहिए क्योंकि यहीं पर हो सकता हैं गायों को थनैला रोग। वैक्टीरिया आस पास न रहे इसलिए करे पहले साफ सफाई। इसके बाद सभी गायों को दूध दुहने वाली मशीन लगाई जा सकती है। दूध दुहने वाली मशीन को भी एक विशेष पदार्थ के घोल में शोधित किया जाता है यह घोल लाल पोठाश का होता है।

क्या होता है मिल्किंग पार्लर

मिल्किंग पार्लर वो जगह है जहां दूध दुहा जाता है ये सब काम मशीनों से लिया जाता हैं क्योंकि एक साथ कई गायों वैसे यहां पर तो एक साथ 40 गायों का दूध नहीं निकाला जा सकता हैं 500 गायों के दूध निकालने में लगभग 2 से ढ़ाई घण्टे लगते हैं। मशीन प्रेशर से दूध भी खींच लेती हैं और उन्ही मशीनों में कोई वैक्टीरिया न रह जाए इसके लिए आखिरी में गर्म पानी से अंदर प्रेशर दिया जाता है।

इन मॉडर्न डेयरियों में गर्मियों के दिनों में गायों को अच्छा फील कराने के लिए कई जगह मिल्किंग पार्लर में पानी के फव्वारे भी लगाए जाते हैं। जैसे गांव देहातों में गाय भैंस पर पानी डाल देते हैं जिससे दूध भी न सुखे और जानवर भी गर्मी से परेशान न हो।

मॉडर्न डेयरी में रखा जाता है हर चीज का डाटा

मशीन से दूध निकालने पर पता चल जाता है कि इस गाय ने सही दूध दिया या नहीं अगर कम मिला तो उसका कारण पता लगाया जा सकता है, बीमार है, सही से चारा नहीं मिला या कुछ और दिक्कत है। अगर किसी गाय के साथ कोई समस्या होती है तो वो भी यहां समझ में आ जाती है।

क्यों है जरूरी प्री और पोस्ट डिपिंग शोधन

वहीं दुहने के बाद गाय-भैंस के थनों को एक बार फिर प्रोस्ट-डिप्रिंग की जाती है। दरअसल दूध निकालने के बाद पशुओं के थनों की कोशिकाएं करीब आधे घंटे तक खुली रहती हैं, जिससे उनमें वैक्टीरिया जाने का भय रहता हैं, संक्रमण होने से बचाने के लिए जरूरी थनों को साफ करना, चूक होने पर पशुओं को थनैला रोग हो जाता है और पशु का थन खराब हो सकता है।

दूध दुहने के बाद की प्रक्रिया

गायों से निकला दूध स्टील की पाइप से बड़े-बड़े कंटेनर में जाता है। आजकल मार्केट में 1 गाय-भैंस दुहने वाली मशीन से लेकर एक साथ 100-500 गाय-भैंसों का दूध निकालने वाली मशीनें आ गई है। मिल्किंग प्रोसेस के अगले चरण में दूध को पाश्चुरीकृत किया जाता है। मशीनों से निकले दूध को एक खास तापमान पर गर्म किया जाता है और तुरंत ठंडा कर दिया है। दूध की इस अवस्था को पाश्चुराइजेशन बोलते हैं। इस प्रोसेज का फायदा ये होता है कि तापमान में हुए इस अचानक परिवर्तन के कारण दूध में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे दूध देर तक रखने पर न ख्टटा होता है न फटता है।

ज्यादातर डेयरी में सुबह और शाम दोनों टाइम गाय-भैस की मिल्किंग की जाती है लेकिन पैकिंग रात में ही पैकिंग और प्रोसेसिंग होती है। पाश्चुराइज मिल्क को पहले से धुली, साफ सैनेटाइज कांच की बोतलों में पैक किया जाता है।

बोतल वाले दूध को सील करने के बाद ऐसे वातानुकूल रुप में यानि बड़े से फ्रिज में रख दिया जाता है। इसी तरह से यही पाश्चुराइज मिल्क अगर आधा, एक या दो किलो के पैकेट में पैक करना होता है तो इस खास फिल्पैक सीएमएस यानि मशीन में आता है।

अच्छी डेयरी में साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता है। इस बात का ध्यान रखा जाता है किसी भी तरह से दूध में हाथ न लगने पाए। अब तो ज्यादातर जगहों पर ऐसी मशीनों भी हैं जहां बोतल अपने आप पैक होकर बाहर निकलती है। इन डेयरी में बाहर से आने वालों को सैनेटाइज किया जाता है। यहां तक कि ट्रक और दूध लाने-ले जाने वाली वैन को भी। ऐसे फिर रोज दूध पैक होकर तड़के पहुंच जाता है आपके घर के आसपास की दुकानों पर या फिर आपके घर तक।

इस प्रकार हमारे और आपके घरों में दूध पहुंच पाता है, दूध दुहने से लेकर दूध पहुंचाने तक बड़ी सावधानी से काम करना पड़ता हैं।

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