खेती के लिए जमीन कम है तो क्या हुआ? झारखंड के किसान बता रहे हैं कि कम जमीन में भी सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई की जा सकती है। रेज्ड बेड, मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तीन तकनीकों को अपनाकर किसान एक ही खेत से साल में तीन बार फसल ले रहे हैं। खास बात यह है कि इससे सिर्फ उत्पादन बढ़ाने में मदद नहीं मिल रही, बल्कि पानी, मजदूरी और खेती की लागत भी कम हो रही है।

भारत में ऐसे छोटे किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। कृषि जनगणना 2015-16 के मुताबिक, देश की करीब 86% कृषि जोत 2 हेक्टेयर तक की हैं। ऐसे में कम जमीन से ज्यादा कमाई करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन झारखंड के कुछ किसानों ने तकनीक और सही फसल के चुनाव से इसी चुनौती को कमाई के मौके में बदलने का तरीका खोज लिया है।
बाजार के हिसाब से फसल चुनते हैं किसान
झारखंड के किसान रणधीर कुमार यादव छोटी जमीन पर खीरा, टमाटर, मिर्च, फूलगोभी समेत कई सब्जियों की खेती करते हैं। वह फसल लगाने से पहले बाजार की मांग और संभावित भाव को ध्यान में रखते हैं, ताकि फसल तैयार होने पर बेहतर कीमत मिल सके। उनके मुताबिक, एक फसल से उन्हें 1 लाख रुपये तक की कमाई हुई है और तकनीक अपनाने से खेती की लागत भी कम हुई है।

वहीं किसान शंकर उरांव करेला, तोरई, आलू, गाजर, अदरक, फूलगोभी और धान जैसी अलग-अलग फसलें उगाते हैं। उनका कहना है कि फसल और बाजार के भाव के हिसाब से उनकी कमाई करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

ड्रिप से पानी और खाद की बचत
इन किसानों के खेती के तरीके में ड्रिप इरिगेशन की अहम भूमिका है। ड्रिप के जरिए पौधों की जड़ों तक जरूरत के हिसाब से पानी पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और खाद का इस्तेमाल भी ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

मल्चिंग से कम हुआ खेती का खर्च
वहीं मल्चिंग की मदद से खेत में खरपतवार कम होते हैं। इससे बार-बार निराई-गुड़ाई और मजदूरी की जरूरत कम पड़ती है। किसानों के मुताबिक, इससे जुताई और खेती से जुड़े दूसरे खर्चों में भी बचत होती है।

एक ही खेत से तीन फसल
रेज्ड बेड तकनीक के साथ ड्रिप और मल्चिंग का इस्तेमाल करके किसान एक ही खेत में लगातार फसल लेने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, इस तरीके से एक साल में तीन फसलें ली जा सकती हैं। यानी छोटी जमीन को खाली रखने के बजाय उसका लगातार इस्तेमाल कर कमाई बढ़ाई जा सकती है।
कम जमीन वालों के लिए क्या है सीख?
इन किसानों की कहानी बताती है कि खेती में कम जमीन हमेशा कम कमाई का मतलब नहीं है। अगर बाजार की मांग के हिसाब से फसल का चुनाव, पानी का सही प्रबंधन और लागत घटाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो छोटी जोत से भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।
खासकर उन किसानों के लिए यह तरीका काम का हो सकता है, जिनके पास 1-2 एकड़ या उससे भी कम जमीन है और वे पारंपरिक खेती के बजाय कम लागत में ज्यादा उत्पादन का रास्ता तलाश रहे हैं।
वीडियो देखिए-





