News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. तकनीक से तरक्की
  3. कम जमीन में 3 बार सब्जियों की खेती, इन 3 तकनीकों से लागत कम और कमाई ज्यादा
तकनीक से तरक्की

कम जमीन में 3 बार सब्जियों की खेती, इन 3 तकनीकों से लागत कम और कमाई ज्यादा

भारत में ऐसे छोटे किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। कृषि जनगणना 2015-16 के मुताबिक, देश की करीब 86% कृषि जोत 2 हेक्टेयर तक की हैं। ऐसे में कम जमीन से ज्यादा कमाई करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन झारखंड के कुछ किसानों ने तकनीक और सही फसल के चुनाव से इसी चुनौती को कमाई के मौके में बदलने का तरीका खोज लिया है।

Pooja Rai

Pooja Rai·24 Aug 2026

 रेज्ड बेड, मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तीन तकनीकों को अपनाकर किसान एक ही खेत से साल में तीन बार फसल ले रहे हैं।

रेज्ड बेड, मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तीन तकनीकों को अपनाकर किसान एक ही खेत से साल में तीन बार फसल ले रहे हैं।

खेती के लिए जमीन कम है तो क्या हुआ? झारखंड के किसान बता रहे हैं कि कम जमीन में भी सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई की जा सकती है। रेज्ड बेड, मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तीन तकनीकों को अपनाकर किसान एक ही खेत से साल में तीन बार फसल ले रहे हैं। खास बात यह है कि इससे सिर्फ उत्पादन बढ़ाने में मदद नहीं मिल रही, बल्कि पानी, मजदूरी और खेती की लागत भी कम हो रही है।

भारत में ऐसे छोटे किसानों की संख्या काफी ज्यादा है। कृषि जनगणना 2015-16 के मुताबिक, देश की करीब 86% कृषि जोत 2 हेक्टेयर तक की हैं। ऐसे में कम जमीन से ज्यादा कमाई करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन झारखंड के कुछ किसानों ने तकनीक और सही फसल के चुनाव से इसी चुनौती को कमाई के मौके में बदलने का तरीका खोज लिया है।

बाजार के हिसाब से फसल चुनते हैं किसान

झारखंड के किसान रणधीर कुमार यादव छोटी जमीन पर खीरा, टमाटर, मिर्च, फूलगोभी समेत कई सब्जियों की खेती करते हैं। वह फसल लगाने से पहले बाजार की मांग और संभावित भाव को ध्यान में रखते हैं, ताकि फसल तैयार होने पर बेहतर कीमत मिल सके। उनके मुताबिक, एक फसल से उन्हें 1 लाख रुपये तक की कमाई हुई है और तकनीक अपनाने से खेती की लागत भी कम हुई है।

वहीं किसान शंकर उरांव करेला, तोरई, आलू, गाजर, अदरक, फूलगोभी और धान जैसी अलग-अलग फसलें उगाते हैं। उनका कहना है कि फसल और बाजार के भाव के हिसाब से उनकी कमाई करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

ड्रिप से पानी और खाद की बचत

इन किसानों के खेती के तरीके में ड्रिप इरिगेशन की अहम भूमिका है। ड्रिप के जरिए पौधों की जड़ों तक जरूरत के हिसाब से पानी पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और खाद का इस्तेमाल भी ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

मल्चिंग से कम हुआ खेती का खर्च

वहीं मल्चिंग की मदद से खेत में खरपतवार कम होते हैं। इससे बार-बार निराई-गुड़ाई और मजदूरी की जरूरत कम पड़ती है। किसानों के मुताबिक, इससे जुताई और खेती से जुड़े दूसरे खर्चों में भी बचत होती है।

एक ही खेत से तीन फसल

रेज्ड बेड तकनीक के साथ ड्रिप और मल्चिंग का इस्तेमाल करके किसान एक ही खेत में लगातार फसल लेने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, इस तरीके से एक साल में तीन फसलें ली जा सकती हैं। यानी छोटी जमीन को खाली रखने के बजाय उसका लगातार इस्तेमाल कर कमाई बढ़ाई जा सकती है।

कम जमीन वालों के लिए क्या है सीख?

इन किसानों की कहानी बताती है कि खेती में कम जमीन हमेशा कम कमाई का मतलब नहीं है। अगर बाजार की मांग के हिसाब से फसल का चुनाव, पानी का सही प्रबंधन और लागत घटाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो छोटी जोत से भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।

खासकर उन किसानों के लिए यह तरीका काम का हो सकता है, जिनके पास 1-2 एकड़ या उससे भी कम जमीन है और वे पारंपरिक खेती के बजाय कम लागत में ज्यादा उत्पादन का रास्ता तलाश रहे हैं।

वीडियो देखिए-

News Potli.
Clip & Share
“

— कम जमीन में 3 बार सब्जियों की खेती, इन 3 तकनीकों से लागत कम और कमाई ज्यादा

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Taknik se tarakki JharkhandDrip Irrigation MulchingFarmingMarginal Farmers
Pooja Rai

About the Author

Pooja Rai

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल, प्रीमियम रेट पर बिक रहा राजस्थान का अनार
तकनीक से तरक्की

कम पानी, कम लागत और लाखों की कमाई! राजस्थान में अनार की खेती का ये मॉडल देखिए

राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा और जालौर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में अनार की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही है। ड्रिप इरिगेशन, टिश्यू कल्चर पौधों और सरकारी सब्सिडी की मदद से किसान कम पानी में बेहतर उत्पादन लेकर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।

Pooja Rai·22 Aug 2026·4 min
गांधीनगर और बनासकांठा के किसान ड्रिप, स्प्रिंकलर और रेज्ड बेड जैसी तकनीकों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को जोड़कर मूंगफली और प्रोसेसिंग-ग्रेड आलू की खेती कर रहे हैं।
तकनीक से तरक्की

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग + स्मार्ट सिंचाई, गुजरात के किसानों का मुनाफे वाला मॉडल

गुजरात के गांधीनगर और बनासकांठा के किसान कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, ड्रिप, स्प्रिंकलर और रेज्ड बेड तकनीक अपनाकर मूंगफली और प्रोसेसिंग-ग्रेड आलू की खेती कर रहे हैं। इससे पानी की बचत, समय पर बुवाई और फसल के लिए बेहतर बाजार मिलने के साथ किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद मिल रही है।

Pooja Rai·10 Aug 2026
मध्यप्रदेश के केले के गढ़ बुरहानपुर के किसान राजेंद्र गंभीर पाटिल हमेशा से केले की खेती करते आ रहे हैं
तकनीक से तरक्की

साइंस-बेस्ड इंटरक्रॉपिंग: तरबूज से लागत निकाली, केला शुद्ध मुनाफा, टर्नओवर 60 लाख रुपये

मध्यप्रदेश के केले के गढ़ बुरहानपुर के किसान राजेंद्र गंभीर पाटिल हमेशा से केले की खेती करते आ रहे हैं। केले के साथ वो तरबूज की सहफसली खेती भी करते हैं। नई तकनीक से खेती कर रहे इस किसान का टर्नओवर 45-60 लाख रुपये का है।

Jalish·06 Aug 2026·5 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs