सब्जियों की खेती में पानी, खाद और कीटनाशक का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसान ऐसी तकनीक अपनाना चाहते हैं, जिससे कम संसाधनों में ज्यादा उत्पादन लिया जा सके। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान में एक फार्म पर खेती के कई आधुनिक तरीकों को अपनाकर इसी दिशा में काम किया जा रहा है।
Dream Valley Agro Farm में करीब 80 एकड़ में सब्जियों और फलों की खेती होती है। यहां Drip Irrigation, Mulching, Raised Bed, Grafted Plants और Integrated Pest Management जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही पानी की बचत और बेहतर सिंचाई के लिए Centralized Irrigation System भी लगाया गया है।
फार्म की खास बात यह है कि यहां किसी नई किस्म को सीधे बड़े खेत में नहीं लगाया जाता। पहले छोटे प्लॉट में Trial किया जाता है और बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्म को ही बड़े स्तर पर उगाया जाता है। यहां लौकी, कद्दू, बैंगन और टमाटर की कई किस्मों पर इस तरह के Trial किए जाते हैं।
फार्म के मैनेजर के मुताबिक, सही किस्म और तकनीक से बैंगन का उत्पादन 40-50 टन प्रति एकड़ और लौकी का करीब 20-25 टन प्रति एकड़ तक मिल सकता है। वहीं शिमला मिर्च और खीरे का उत्पादन करीब 10-15 टन प्रति एकड़ तक पहुंच सकता है।
फार्म में G9 Banana की खेती भी की जा रही है। अब सवाल यह है कि इन तकनीकों को छोटे किसान अपने खेत में कैसे अपना सकते हैं और क्या Subsidy, AI और Digital Learning इसमें उनकी मदद कर सकते हैं?
देखिए “तकनीक से तरक्की” के 67वें एपिसोड में, और समझिए कि सही तकनीक और सही Variety के चुनाव से सब्जियों की खेती में उत्पादन और कमाई कैसे बढ़ाई जा सकती है।





