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किसानों के मसीहा पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न

नई दिल्ली/लखनऊ। भारत सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरितक्रांति के अगुवा प्रो. एमएस. स्वामीनाथन को देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न देने का ऐलान किया है। इन दोनों के साथ-साथ मोदी सरकार

Pooja Rai

Pooja Rai·09 Feb 2024· 2 min read

किसानों के मसीहा पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न

किसानों के मसीहा पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न

नई दिल्ली/लखनऊ। भारत सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरितक्रांति के अगुवा प्रो. एमएस. स्वामीनाथन को देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न देने का ऐलान किया है। इन दोनों के साथ-साथ मोदी सरकार पूर्व-प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव, बिहार के कर्पूरी ठाकुर और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी देगी।

किसान मसीहा पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह
चौधरी चरण सिंह, देश के पांचवें प्रधानमंत्री के तौर पर 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक सत्ता संभाली। जनता पार्टी के सदस्य थे और उन्हें भारत के बड़े किसान नेताओं में गिना जाता है। वह यूपी में भूमि सुधार के मुख्य वास्तुकार थे । 23 दिसंबर 1902 को इनका जन्म हुआ था जिन्हें किसानों के सबसे बड़े मसीहा के रूप में जाना जाता है और इसलिए साल 2001 में चौधरी चरण सिंह के सम्मान में हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाने का फैसला किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए लिखा, "ये सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है. उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की"

कृषि विज्ञानी एम. एस. स्वामीनाथन
हरित क्रांति के जनक के तौर पर एम. एस. स्वामीनाथन (1925-2023) एक प्रसिद्ध कृषि-विज्ञानी और पौधों के आनुवंशिक विज्ञानी थे। देश को अकाल से बचाने के लिए स्वामीनाथन और उनके अमेरिकी वैज्ञानिक साथी नॉर्मन बोरलॉग को ही श्रेय दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके लिये लिखा कि उनका काम छात्रों को सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है।60 के दशक में उन्होंने धान की ज़्यादा उपजाऊ क़िस्मों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई थी। 'हरित क्रांति' की सफलता के लिए उन्होंने दो केंद्रीय कृषि मंत्रियों - सी. सुब्रमण्यम और जगजीवन राम - के साथ मिलकर काम किया था। साल 2023 में 28 सितंबर को स्वामीनाथन का देहात हो गया था।

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