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11 तालाबों से 36 टन थाई मांगुर नष्ट, जानिए इस मछली पर कब से है प्रतिबंध और क्यों होता है अवैध पालन

भारत में Clarias gariepinus के पालन पर 19 दिसंबर 1997 से रोक है। इसके बाद केंद्र के मत्स्य विभाग ने 10 जनवरी 2013 और 20 फरवरी 2019 के आदेशों के जरिए इस प्रतिबंध को फिर से स्पष्ट किया। वहीं 5 अप्रैल 2024 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी विदेशी कैटफिश और उसके हाइब्रिड के पालन और प्रजनन पर देशभर में रोक को स्पष्ट करते हुए मौजूद स्टॉक को नष्ट करने के निर्देश दिए।

Pooja Rai

Pooja Rai·21 Aug 2026

महाराष्ट्र के नागपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर के अवैध पालन और बिक्री के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।

महाराष्ट्र के नागपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर के अवैध पालन और बिक्री के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।

महाराष्ट्र के नागपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर के अवैध पालन और बिक्री के खिलाफ मत्स्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पारशिवनी तहसील के चिचोली (महादुला) में विभाग की टीम ने 11 तालाबों पर छापा मारकर करीब 36 टन थाई मांगुर मछलियां निकालीं और उन्हें नष्ट कर दिया। कार्रवाई गुरुवार दोपहर शुरू हुई और देर शाम तक चली। अंधेरा होने के कारण बाकी कार्रवाई शुक्रवार को की जाएगी।

मत्स्य विभाग को पिछले कुछ दिनों से बाजार में थाई मांगुर की बढ़ती आवक की जानकारी मिल रही थी। जांच में इसका स्रोत पारशिवनी तहसील के कुछ तालाबों से जुड़ा मिला। इसके बाद विभाग ने गूगल मैप के जरिए तालाबों की जानकारी जुटाई और डमी ग्राहक भेजकर अवैध पालन और बिक्री की पुष्टि की। जानकारी पुख्ता होने के बाद सहायक आयुक्त शुभम कोमरेवार के नेतृत्व में करीब 25 लोगों की टीम ने कार्रवाई की। तालाब मालिक शकील खान अब्दुल सलाम खान के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विभाग के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में इससे पहले करीब 51 टन प्रतिबंधित मछली नष्ट की जा चुकी है।

थाई मांगुर क्या है और इस पर रोक क्यों है?

जिसे आमतौर पर थाई मांगुर कहा जाता है, वह असल में अफ्रीकन कैटफिश (Clarias gariepinus) है। इसे भारत की देशी मांगुर Clarias batrachus से अलग समझना जरूरी है। प्रतिबंध विदेशी Clarias gariepinus और इसके हाइब्रिड पर है, जबकि देशी मांगुर अलग प्रजाति है।

भारत में Clarias gariepinus के पालन पर 19 दिसंबर 1997 से रोक है। इसके बाद केंद्र के मत्स्य विभाग ने 10 जनवरी 2013 और 20 फरवरी 2019 के आदेशों के जरिए इस प्रतिबंध को फिर से स्पष्ट किया। वहीं 5 अप्रैल 2024 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी विदेशी कैटफिश और उसके हाइब्रिड के पालन और प्रजनन पर देशभर में रोक को स्पष्ट करते हुए मौजूद स्टॉक को नष्ट करने के निर्देश दिए।

देशी मछलियों के लिए खतरा

थाई मांगुर पर रोक की मुख्य वजह देशी मछलियों और जलीय जैव विविधता पर इसका संभावित खतरा है। यह एक विदेशी और आक्रामक प्रजाति है। अगर यह तालाबों से निकलकर नदियों या दूसरे प्राकृतिक जलस्रोतों में पहुंचती है, तो वहां की देशी मछलियों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।

ICAR ने भी अफ्रीकन कैटफिश को भारत के मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चिंता वाली आक्रामक विदेशी प्रजातियों में शामिल किया है।

प्रतिबंध के बावजूद क्यों होता है पालन?

प्रतिबंध के बावजूद थाई मांगुर का अवैध पालन होने की बड़ी वजह इसकी तेज बढ़वार और बाजार में मांग है। यह मछली कम अनुकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है और जल्दी तैयार हो जाती है। ऐसे में कुछ लोग कम समय में उत्पादन और कमाई के लालच में इसका अवैध पालन करते हैं।

इसके अलावा इसकी अपेक्षाकृत कम कीमत और बाजार की मांग भी अवैध कारोबार को बढ़ावा देती है। कई जगहों पर इसे तालाबों के अलावा छोटे गड्ढों और दूसरे अनधिकृत स्थानों पर भी पाले जाने की जानकारी सामने आती रही है, जिससे इसकी निगरानी मुश्किल हो जाती है।

तीन महीने में 87 टन से ज्यादा मछली नष्ट

नागपुर की ताजा कार्रवाई में करीब 36 टन थाई मांगुर नष्ट की गई है। विभाग के मुताबिक, इससे पहले तीन महीनों में करीब 51 टन प्रतिबंधित मछली नष्ट की जा चुकी थी। यानी इन कार्रवाइयों में कुल मिलाकर 87 टन से ज्यादा प्रतिबंधित मछली नष्ट की जा चुकी है।

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— 11 तालाबों से 36 टन थाई मांगुर नष्ट, जानिए इस मछली पर कब से है प्रतिबंध और क्यों होता है अवैध पालन

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