News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. तकनीक से तरक्की
  3. तकनीक से तरक्की: बरेली की 41°C की गर्मी में अंगूर की खेती कर रहा यह किसान
तकनीक से तरक्की

तकनीक से तरक्की: बरेली की 41°C की गर्मी में अंगूर की खेती कर रहा यह किसान

उत्तर प्रदेश की पारंपरिक फसलों से अलग बरेली के किसान अनिल साहनी अंगूर समेत 200 से अधिक फल प्रजातियों की खेती और प्रयोग कर रहे हैं। मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने डिजिटल मौसम निगरानी प्रणाली और स्थानीय तकनीकों का सहारा लिया है। जानिए कैसे डेटा आधारित खेती और प्रोसेसिंग के जरिए किसान नई फसलों से बेहतर कमाई की राह तलाश रहे हैं।

Jayant Mishra

Jayant Mishra·Multimedia Journalist·28 Jul 2026

तकनीक से तरक्की: बरेली की 41°C की गर्मी में अंगूर की खेती कर रहा यह किसान

बरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की पहचान लंबे समय से गन्ना, धान और आलू जैसी पारंपरिक फसलों से रही है। लेकिन बरेली के प्रगतिशील किसान अनिल साहनी इस तस्वीर को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों से वे अपने फार्म पर सफलतापूर्वक अंगूर की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश-विदेश की 200 से अधिक फल प्रजातियों का संग्रह तैयार किया है और 100 से ज्यादा नई किस्मों पर प्रयोग कर रहे हैं।

प्रगतिशील किसान अनिल साहनी
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी

अनिल साहनी बताते हैं कि उनके फार्म पर कई ऐसे फलदार पौधे भी हैं, जिन्हें आमतौर पर ठंडे इलाकों की फसल मानी जाता है। उत्तर प्रदेश की भीषण गर्मी से इन पौधों को बचाने के लिए उन्होंने बांस की खपच्चियों और शेड जैसी स्थानीय तकनीकों का इस्तेमाल किया है। उनका कहना है कि यदि सही तकनीक अपनाई जाए तो जलवायु की चुनौतियों के बावजूद नई फसलों की खेती संभव है।

हर 15 मिनट में मिलता है मौसम का डेटा

Zeal Mason's-type wet and dry bulb hygrometer used for measuring atmospheric moisture and temperature.
Zeal Mason's-type wet and dry bulb hygrometer used for measuring atmospheric moisture and temperature.

अनिल साहनी ने अपने फार्म पर डिजिटल मौसम निगरानी प्रणाली लगाई है। अलग-अलग प्लॉट में ऑटोमैटिक डेटा लॉगर लगाए गए हैं, जो हर 15 मिनट पर तापमान, आर्द्रता, हवा की गति, धूप की तीव्रता और अन्य मौसम संबंधी आंकड़े रिकॉर्ड करते हैं। यह जानकारी सीधे उनके मोबाइल और कंप्यूटर तक पहुंचती है, जिससे वह सही समय पर सिंचाई, पोषण प्रबंधन और फसल से जुड़े फैसले वैज्ञानिक तरीके से ले पाते हैं।

उनका कहना है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के दौर में डेटा आधारित खेती भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।

बरेली की जलवायु में भी सफल हो रही अंगूर की खेती

गर्मियों में बरेली का अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में यह लगभग 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अंगूर (विटिस विनीफेरा) की खेती गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु में बेहतर होती है। भारत में इसकी खेती समुद्र तल से लगभग 250 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जाती है।

टेबल ग्रेप्स और वाइन ग्रेप्स में क्या अंतर है?

अंगूर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—टेबल ग्रेप्स और वाइन ग्रेप्स।

टेबल ग्रेप्स बड़े, मीठे और पतले छिलके वाले होते हैं, इसलिए इन्हें ताजा खाने के लिए उगाया जाता है। वहीं वाइन ग्रेप्स आकार में छोटे, मोटे छिलके वाले और अधिक शर्करा (शुगर) वाले होते हैं, जिनका उपयोग वाइन बनाने में किया जाता है।

दोनों की गुणवत्ता मापने के तरीके भी अलग हैं। टेबल ग्रेप्स की गुणवत्ता उनके आकार, स्वाद, रंग और ताजगी से आंकी जाती है, जबकि वाइन ग्रेप्स की गुणवत्ता उनकी शर्करा, अम्लता (एसिडिटी), खुशबू और अन्य रासायनिक गुणों के आधार पर तय होती है। हालांकि दोनों में मिठास का स्तर डिग्री ब्रिक्स (°Brix) से मापा जाता है।

कीमत में भी होता है अंतर

खाने वाले टेबल ग्रेप्स आमतौर पर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं, इसलिए घरेलू बाजार में इनकी कीमत लगभग 80 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल सकती है।

वहीं वाइन ग्रेप्स की बिक्री अधिकतर वाइन कंपनियों के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) के तहत होती है। इनकी कीमत किस्म और गुणवत्ता के आधार पर तय होती है और सामान्यतः 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहती है।

प्रोसेसिंग से बढ़ सकती है किसानों की आय

अनिल साहनी का कहना है कि किसान अक्सर केवल कच्चा उत्पाद बेचते हैं, जबकि सबसे अधिक मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग में होता है। यदि किसान सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने और प्रोसेसिंग पर ध्यान दें, तो उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत में अंगूर उत्पादन

APEDA के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत में लगभग 1.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अंगूर की खेती की गई और कुल उत्पादन करीब 36.51 लाख मीट्रिक टन रहा।

State wise Grapes Production 204-25. Source: APEDA
State wise Grapes Production 204-25. Source: APEDA

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक राज्य है, जिसका कुल उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत योगदान है। वर्ष 2024-25 में राज्य का उत्पादन लगभग 23.77 लाख मीट्रिक टन रहा। इसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का स्थान है।

भारत से अंगूर का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में देश ने लगभग 353.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के अंगूर नीदरलैंड, रूस, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश सहित कई देशों को निर्यात किए।

वीडियो देखिए:

News Potli.
Clip & Share
“

— तकनीक से तरक्की: बरेली की 41°C की गर्मी में अंगूर की खेती कर रहा यह किसान

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
GrapesUttar PradeshHorticultureTakneek se Tarraki
Jayant Mishra

About the Author

Jayant Mishra

Multimedia Journalist

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें

गुजरात के गांधीनगर के किसान जगदीशभाई पटेल ने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीकों की मदद से 20 एकड़ में सब्जियों की खेती का सफल मॉडल तैयार किया है।
तकनीक से तरक्की

आधुनिक खेती का कमाल! 20 एकड़ में सब्जियों की खेती से लाखों की बिक्री

गुजरात के गांधीनगर के किसान जगदीशभाई पटेल ने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीकों की मदद से 20 एकड़ में सब्जियों की खेती का सफल मॉडल तैयार किया है। वे मिर्च, टमाटर, पत्ता गोभी और फूलगोभी की खेती से हर साल ₹50–60 लाख की बिक्री करते हैं।

Pooja Rai·25 Jul 2026
चंदौली के युवा किसान अनिल मौर्य ने सिर्फ 5 बिस्वा से शुरुआत कर आज 50 बीघा में आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा किया है।
तकनीक से तरक्की

5 बिस्वा से 50 बीघा तक का सफर: फसल कैलेंडर और स्मार्ट मार्केटिंग से बदली खेती की तस्वीर

चंदौली के युवा किसान अनिल मौर्य ने सिर्फ 5 बिस्वा से शुरुआत कर आज 50 बीघा में आधुनिक खेती का सफल मॉडल खड़ा किया है। बागवानी, ड्रिप सिंचाई, स्मार्ट मार्केटिंग और फसल कैलेंडर के जरिए उन्होंने नई फसलों को अपनाया और बेहतर दाम हासिल किए।

Pooja Rai·23 Jul 2026·3 min
ड्रिप इरिगेशन और टिशू कल्चर का कमाल, प्रीमियम रेट पर बिक रहा राजस्थान का अनार
तकनीक से तरक्की

रेगिस्तान में उग रहा प्रीमियम अनार, जानिए सफलता का पूरा मॉडल

राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा और जालौर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में अनार की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही है। ड्रिप इरिगेशन, टिश्यू कल्चर पौधों और सरकारी सब्सिडी की मदद से किसान कम पानी में बेहतर उत्पादन लेकर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।

Pooja Rai·22 Jul 2026·4 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs