उत्तर प्रदेश में इस बार धान की सरकारी खरीद में योगी सरकार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। पिछले साल प्रदेश में 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रदेश में 4,500 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। किसानों को सामान्य धान के लिए ₹2,441 और ग्रेड-A धान के लिए ₹2,461 प्रति क्विंटल MSP मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में धान खरीद नीति को मंजूरी दी गई है।
धान की खरीद कब और कहां से शुरू होगी?
सरकार ने पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए धान खरीद की अलग-अलग तारीखें तय की हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 12 अक्टूबर से और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर से खरीद शुरू होगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ और झांसी संभाग में 12 अक्टूबर से धान खरीदा जाएगा। इसके साथ ही लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों में भी इसी तारीख से खरीद होगी। इन क्षेत्रों में खरीद 15 फरवरी 2027 तक चलेगी।
वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर और प्रयागराज संभाग में 1 नवंबर से खरीद शुरू होगी। लखनऊ संभाग के लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जिलों में भी इसी दिन से धान खरीदा जाएगा। इन क्षेत्रों में खरीद 28 फरवरी 2027 तक चलेगी।
किसानों को कितना मिलेगा धान का MSP?
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया है। इसके तहत सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान का ₹2,461 प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
4,500 केंद्रों पर 8 एजेंसियां करेंगी खरीद
धान खरीद के लिए प्रदेश में 8 क्रय एजेंसियों के माध्यम से 4,500 केंद्र संचालित किए जाएंगे। इनमें खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद और उससे जुड़े एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड और भारतीय खाद्य निगम शामिल हैं।
जिलाधिकारी अपने जिले में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्रय केंद्रों की जगह तय करेंगे। सरकार का लक्ष्य पिछले साल की 62 लाख मीट्रिक टन खरीद से आगे बढ़कर इस बार 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदना है।
फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट
इस बार जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी हुई है, उन्हें धान बेचने के लिए अलग से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराना होगा। एग्रीस्टैक योजना के तहत बनी किसान पहचान के आधार पर उनकी उपज खरीदी जाएगी। सरकार के मुताबिक, इससे किसानों को दोबारा पंजीकरण कराने की परेशानी से राहत मिलेगी।
9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे तक करीब 13,943 किसान धान बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके थे।
धान बेचने के 48 घंटे के भीतर भुगतान की व्यवस्था
सरकार ने किसानों को धान बेचने के बाद जल्द भुगतान करने की व्यवस्था की है। बैंक खाते का सत्यापन होने के बाद सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से यथासंभव 48 घंटे के भीतर पैसा सीधे किसानों के खाते में भेजा जाएगा। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
GPS से होगी ढुलाई की निगरानी, बोरों की भी व्यवस्था
धान की खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए क्रय केंद्रों से चावल मिलों तक धान ले जाने वाले वाहनों में GPS का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, कुछ चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर QR कोड के जरिए उनकी आवाजाही और बिलिंग पर नजर रखी जाएगी।
खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी व्यवस्था की जा रही है। दी गई जानकारी के मुताबिक, 80 हजार बोरे उपलब्ध कराए जा चुके हैं और कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है।





