लखनऊ। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में बायोप्लास्टिक (PLA) के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए बलरामपुर चीनी मिल्स को 75 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की है। यह सहायता जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के तहत BIRAC द्वारा सरकार की BioE3 योजना के अंतर्गत दी गई है।
कंपनी लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित अपने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग परिसर में 100 टन प्रति वर्ष क्षमता का पायलट R&D प्लांट लगाएगी। इस परियोजना की कुल लागत 110 करोड़ रुपये है।
क्या बनेगा इस प्लांट में?
इस केंद्र में पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) और उससे जुड़े को-पॉलिमर विकसित किए जाएंगे। PLA गन्ने जैसी जैविक सामग्री से बनने वाला एक बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक है, जिसे पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक का टिकाऊ विकल्प माना जाता है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह परियोजना “वेस्ट टू वेल्थ” की दिशा में अहम कदम है और टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा देगी।
3,000 करोड़ की बड़ी परियोजना भी जारी
बलरामपुर चीनी मिल्स इसी परिसर में 80,000 टन प्रति वर्ष क्षमता का भारत का पहला एकीकृत वाणिज्यिक PLA प्लांट भी स्थापित कर रही है। इस परियोजना में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है।





