तमिलनाडु की नई सरकार ने अपना पहला कृषि बजट पेश किया है। इस बजट में पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर खास जोर दिया गया है। सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती, मिट्टी की सेहत सुधारने, दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, मोटे अनाज (मिलेट्स) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया है
मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए नया मिशन
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आर. विनोद ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 का कृषि बजट पेश किया। सरकार अगले 5 वर्षों के लिए तमिलनाडु मृदा उर्वरता मिशन (Soil Fertility Mission) शुरू करेगी। इस पर 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत पहली बार राज्य के किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे। हालांकि यह सुविधा केवल फार्मर आईडी वाले किसानों को मिलेगी।
कपास की खेती बढ़ाने के लिए नया मिशन
राज्य सरकार ने 5 वर्षीय कॉटन रेनेसां मिशन भी शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत हाई डेंसिटी प्लांटिंग, अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटिंग, आधुनिक फसल प्रबंधन और सहफसली खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य कपास की पैदावार बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करना है।
फसल बीमा के लिए 649 करोड़ रुपये
सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के लिए 649 करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह योजना 37 जिलों के 14 क्लस्टरों में लागू होगी और तीनों फसल सीजन को कवर करेगी।
सरकार का दावा है कि इससे 36 लाख एकड़ खेती को बीमा सुरक्षा मिलेगी और करीब 15 लाख किसानों को लाभ होगा। योजना से जुड़ने वाले सभी पात्र किसानों को शामिल करने के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्र की योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने साफ किया है कि वह कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार की योजनाओं का भी पूरा लाभ उठाएगी। वहीं किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा भी जारी रहेगी। इसके लिए सरकार ने 7,433 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
सरकार का कहना है कि इस बजट का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की मदद से किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक लाभदायक बनाना है।
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