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रबी की तैयारी को लेकर केंद्र का बड़ा प्लान, 22 अक्टूबर से चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन देश और किसान हमेशा रहेंगे। इसलिए सभी को ‘टीम एग्रीकल्चर’ की तरह काम करना चाहिए।

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News Potli·News Potli Desk·29 Sep 2026

रबी की तैयारी को लेकर केंद्र का बड़ा प्लान, 22 अक्टूबर से चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

रबी सीजन की तैयारी को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कई अहम फैसले लिए हैं। दिल्ली में हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों के साथ खेती-किसानी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें पानी और मिट्टी बचाने से लेकर किसानों को सही बीज-खाद दिलाने, फसल की खरीद और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने तक की योजना पर बात हुई।

कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन देश और किसान हमेशा रहेंगे। इसलिए सभी को ‘टीम एग्रीकल्चर’ की तरह काम करना चाहिए।

10 राज्यों को 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत 10 राज्यों को 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा के स्वीकृति पत्र दिए गए।

इनमें पश्चिम बंगाल को 290 करोड़, हरियाणा को 198 करोड़, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़, बिहार को 114 करोड़, कर्नाटक को 104 करोड़, मिजोरम को 75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़, झारखंड को 58 करोड़ और पंजाब को 43 करोड़ रुपये शामिल हैं।

हर महीने होगी खेती की समीक्षा

कृषि मंत्री ने कहा कि अब केंद्र और राज्यों के बीच खेती से जुड़े कामों की नियमित समीक्षा होगी। हर महीने वर्चुअल बैठक होगी, जिसमें फसल की स्थिति और योजनाओं की प्रगति देखी जाएगी।

राज्य स्तर पर कृषि मंत्री, अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालय, ICAR संस्थान, KVK, ATMA, FPO, किसान, प्रोसेसर और एक्सपोर्टर को जोड़कर एक ‘स्टेट एग्रीकल्चर टीम’ बनाई जाएगी। वहीं जिला स्तर पर भी कलेक्टर, कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक, बैंक और किसानों की बैठक होगी।

रबी और खरीफ की तैयारी के लिए पहले से बैठक

अब खेती के सीजन शुरू होने से पहले ही तैयारी की जाएगी। खरीफ की तैयारी के लिए हर साल 10 मई को जिला स्तर और 17 मई को राज्य स्तर पर बैठक होगी।

इसी तरह रबी सीजन के लिए 10 सितंबर को जिला स्तर और 17 सितंबर को राज्य स्तर पर बैठक करना जरूरी होगा। इसका मकसद है कि बीज, खाद, पानी और दूसरी जरूरतों की तैयारी बुवाई शुरू होने से पहले ही पूरी कर ली जाए।

22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’

किसानों की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत बचाने के लिए इस साल 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा।

इसमें किसानों को Soil Health Card के आधार पर जरूरत के हिसाब से खाद डालने के लिए जागरूक किया जाएगा। सरकार का जोर है कि किसान जरूरत से ज्यादा खाद न डालें, इससे लागत भी बढ़ती है और मिट्टी की सेहत भी खराब होती है।

इस अभियान में वैज्ञानिकों को भी जोड़ा जाएगा।

धान के बाद खाली खेतों में दलहन पर जोर

पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान की कटाई के बाद काफी खेत खाली रह जाते हैं। इन खेतों में दलहन की खेती को बढ़ावा देने की योजना है।

इससे खाली जमीन का इस्तेमाल होगा और किसानों को एक अतिरिक्त फसल से आमदनी का मौका मिल सकता है।

पानी देखकर ही फसल चुनें

रबी की तैयारी में कृषि मंत्री ने पानी और मिट्टी की नमी का ध्यान रखने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां पानी कम है, वहां ज्यादा पानी मांगने वाली फसल न लगाई जाए।

किसानों को अपने इलाके की पानी की उपलब्धता, मिट्टी की नमी और मौसम को देखकर फसल और बीज का चुनाव करना चाहिए।

नकली खाद-बीज पर सख्ती

सरकार ने राज्यों को नकली खाद, नकली बीज और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने जबरन टैगिंग को भी पूरी तरह खत्म करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को सामान खरीदने के लिए किसी खास उत्पाद या कंपनी को लेने के लिए मजबूर न किया जाए।

प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण पर जोर

खेती को ज्यादा टिकाऊ और किसानों के लिए फायदे का बनाने के लिए प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की बात कही गई।

यानी किसान सिर्फ एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ पशुपालन, बागवानी या दूसरी गतिविधियों को भी जोड़ सकते हैं।

तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद का भरोसा

किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए सरकार ने तुअर, उड़द और मसूर की MSP पर 100 फीसदी सरकारी खरीद का भरोसा दिया है। सरकार के मुताबिक खरीद के बाद किसानों को 48 घंटे में भुगतान करने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके साथ ही वैज्ञानिक तरीके से भंडारण, वेयरहाउस और बेहतर बाजार व्यवस्था पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि किसान को फसल बेचने के लिए मजबूर होकर कम दाम न लेना पड़े।

भारतीय फसलें अब विदेशी बाजार तक पहुंचेंगी

कृषि मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का फायदा भारतीय किसानों को दिलाने की कोशिश की जा रही है। इसके जरिए फल, सब्जियां, अनाज और दूसरे कृषि उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को देश के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी बेहतर दाम मिलें और भारत को दुनिया का एक बड़ा ‘फूड बास्केट’ बनाया जा सके।

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