पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी संरक्षित खेती में बड़ी रकम लगाने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। वजह है सब्सिडी के नियमों में बदलाव। किसानों का कहना है कि उन्होंने पुराने नियमों के भरोसे बैंक से कर्ज लेकर परियोजना शुरू की, लेकिन अब सब्सिडी की दर और पात्रता के नियम बदलने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ सकता है। इसी बीच राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) ने पुराने लंबित मामलों को लेकर स्थिति साफ की है। आइए समझते हैं कि नए नियम क्या हैं, किसान क्यों विरोध कर रहे हैं, उनकी क्या मांग है और NHB ने अब क्या फैसला किया है।
NHB के नए नियम क्या हैं?
NHB ने 21 अगस्त 2026 को सब्सिडी से जुड़े नियमों में बदलाव किया। सबसे बड़ा बदलाव पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी संरक्षित खेती की परियोजनाओं पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर है।
- सामान्य क्षेत्रों में सब्सिडी 50 फीसदी से घटाकर 35 फीसदी कर दी गई।
- पहाड़ी और अनुसूचित क्षेत्रों में सब्सिडी 50 से घटाकर 45 फीसदी कर दी गई।
- एक परिवार से अब सिर्फ एक व्यक्ति को इस तरह की वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
- परिवार में पति-पत्नी, माता-पिता और बेटे-बेटियों को शामिल किया गया है।
- मंत्री, सांसद, विधायक, नगर निगम के महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर रहने वाले लोग पात्र नहीं होंगे।
- केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, सरकारी कंपनियों और स्थानीय निकायों के ज्यादातर कर्मचारियों को भी सब्सिडी से बाहर किया गया है। हालांकि, ग्रुप डी/क्लास IV कर्मचारियों को छूट दी गई है।
- 10 हजार रुपये या उससे ज्यादा मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी भी इस सहायता के लिए पात्र नहीं होंगे।
किसान क्यों कर रहे थे विरोध?
किसानों की सबसे बड़ी चिंता सब्सिडी घटने को लेकर थी। कई किसानों ने पुराने नियमों के तहत बैंक से कर्ज लेकर पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस बनाना शुरू कर दिया था। ऐसे में 50 फीसदी की जगह 35 फीसदी सब्सिडी मिलने पर उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
किसानों का यह भी कहना है कि कई परिवारों में बेटे-बेटियां अलग-अलग खेती करते हैं। उनके पास अलग जमीन, बैंक खाता और खेती का कर्ज भी हो सकता है। ऐसे में एक परिवार से सिर्फ एक व्यक्ति को सब्सिडी देने वाला नियम उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
किसानों की क्या मांग है?
किसानों की मांग है कि संरक्षित खेती की सब्सिडी फिर से 50 फीसदी की जाए और 21 अगस्त से पहले शुरू हो चुके या जिनमें निवेश हो चुका है, ऐसे पुराने प्रोजेक्ट पुराने नियमों के हिसाब से निपटाए जाएं। साथ ही, पुराने लंबित सब्सिडी मामलों का जल्द निपटारा हो और पुराने नियमों के आधार पर कर्ज लेने वाले किसानों को उसी हिसाब से सब्सिडी मिले। किसान ‘एक परिवार–एक लाभार्थी’ नियम पर भी पुनर्विचार चाहते हैं, ताकि अलग जमीन और अलग वित्तीय व्यवस्था के साथ खेती करने वाले परिवार के वयस्क सदस्यों को अलग लाभ मिल सके।
इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सब्सिडी से बाहर रखने वाली शर्त की समीक्षा, पॉलीहाउस और संरक्षित खेती की संरचनाओं पर GST घटाकर 5 फीसदी करने और हाईटेक व बागवानी उत्पादन को बेहतर बाजार व कृषि निर्यात से जोड़ने की मांग भी की गई है। किसानों का यह भी कहना है कि परियोजनाओं की जांच और सब्सिडी भुगतान की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि उन्हें लंबे समय तक भुगतान का इंतजार न करना पड़े।
NHB ने क्या किया?
किसानों की चिंता के बीच NHB ने 3 सितंबर 2026 को नए Grant of Clearance (GoC) आवेदनों को 4 सितंबर से एक महीने के लिए रोक दिया। NHB ने बताया कि इस दौरान संशोधित नियमों को लागू करने की व्यवस्था की जा रही है।
लेकिन सबसे अहम बात अब NHB के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा के बयान से सामने आई है। उन्होंने साफ किया है कि पुराने मामलों में अगर किसान का सब्सिडी दावा सही और पात्र पाया जाता है, तो उस पर नए नियम पीछे की तारीख से लागू नहीं होंगे। यानी पुराने और सही मामलों को पुराने नियमों के हिसाब से ही निपटाया जाएगा।
हालांकि, जहां गंभीर नियमों का उल्लंघन या गलत तरीके से सरकारी लाभ लेने की बात सामने आएगी, वहां यह राहत लागू नहीं होगी।
अब पुराने लंबित मामलों की जांच होगी और यह देखा जाएगा कि किसान का दावा सही है या नहीं। पात्र पाए जाने वाले पुराने मामलों को पुराने नियमों के अनुसार निपटाया जाएगा। वहीं नए आवेदनों पर संशोधित नियम लागू होंगे।
क्या है NHB ?
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में बागवानी को बढ़ावा देना और किसानों को आधुनिक खेती अपनाने में मदद करना है। NHB के जरिए पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और दूसरी संरक्षित खेती की परियोजनाओं के लिए किसानों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा, बागवानी फसलों के उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने में भी NHB की अहम भूमिका है।





