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5 राज्यों ने घटाया रासायनिक खाद का इस्तेमाल, PM-PRANAM योजना का दिखा असर

केंद्र सरकार के अनुसार, PM-PRANAM योजना के तहत 2025-26 में 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाई है। सरकार जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है, ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो।

Pooja Rai

Pooja Rai·05 Aug 2026

सरकार चाहती है कि किसान रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम करें और मिट्टी की सेहत सुधारने वाली खेती अपनाएं।

सरकार चाहती है कि किसान रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम करें और मिट्टी की सेहत सुधारने वाली खेती अपनाएं।

नई दिल्ली। सरकार चाहती है कि किसान रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम करें और मिट्टी की सेहत सुधारने वाली खेती अपनाएं। इसी उद्देश्य से चल रही PM-PRANAM योजना के तहत 2025-26 में 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाई है। सरकार का कहना है कि इससे संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

5 राज्यों में घटी रासायनिक उर्वरकों की खपत

सरकार के मुताबिक, दादरा एवं नगर हवेली, दिल्ली, गोवा, मणिपुर और मिजोरम में पिछले तीन वित्तीय वर्षों की औसत खपत की तुलना में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की कुल खपत में 0.18 लाख मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, इन राज्यों को योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अभी जारी नहीं की गई है।यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।

क्या है PM-PRANAM योजना?

PM-PRANAM (प्रधानमंत्री कार्यक्रम फॉर रिस्टोरेशन, अवेयरनेस, नरिशमेंट एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ मदर अर्थ) की शुरुआत 28 जून 2023 को की गई थी। यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग बढ़ाने, जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करती है।

यदि कोई राज्य पिछले तीन वर्षों की औसत खपत की तुलना में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करता है, तो उसे बची हुई उर्वरक सब्सिडी का 50 प्रतिशत प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है। इसमें 95 प्रतिशत राशि संबंधित राज्य को और 5 प्रतिशत केंद्र सरकार के पास रहती है।

जैविक खेती के लिए मिल रही आर्थिक सहायता

सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है।

  • PKVY के तहत किसानों को 3 साल में 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है।
  • MOVCDNER के तहत किसानों को 3 साल में 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता मिलती है।

30 जून 2026 तक PKVY के तहत 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया गया है, जिससे 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला है। वहीं MOVCDNER के तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया गया है और 2.74 लाख किसानों को फायदा पहुंचा है।

प्राकृतिक खेती को भी मिल रहा बढ़ावा

सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) के जरिए भी रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा दे रही है। इस मिशन के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को 2 वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 में इस मिशन के तहत 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 18,893 क्लस्टर बनाए गए, जिनसे 20.93 लाख किसान जुड़े। इसके अलावा 33,257 कृषि सखियों को प्रशिक्षण दिया गया और 7,601 जैव-इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए गए।

मिट्टी की सेहत सुधारने पर सरकार का जोर

सरकार ने बताया कि किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और जैविक खाद के उपयोग के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ICAR ने 50 फसलों के लिए ड्रिप फर्टिगेशन मॉडल तैयार किए हैं, जबकि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट, फॉस्फो कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, खेती की लागत कम होगी और किसानों को टिकाऊ खेती अपनाने में मदद मिलेगी।

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