खेती में ड्रोन का इस्तेमाल अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। फसलों पर दवा और दूसरे कृषि कार्यों में ड्रोन किसानों का समय और मेहनत बचा सकते हैं। इसी को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार राज्य में 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने जा रही है। इन सेंटरों के जरिए किसानों को किराए पर ड्रोन और दूसरी आधुनिक कृषि सेवाएं मिल सकेंगी। वहीं, ग्रामीण युवाओं के लिए इसे रोजगार और स्वरोजगार का मौका भी माना जा रहा है।
कृषि स्नातकों को 50% तक सब्सिडी
इस योजना के तहत कृषि स्नातकों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। वहीं, गैर-कृषि स्नातकों को 40 प्रतिशत तक, अधिकतम 4 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की प्रति परियोजना लागत 10 लाख रुपये तय की गई है। यानी पात्र युवा सरकारी सहायता लेकर ड्रोन सेंटर शुरू कर सकते हैं और किसानों को जरूरत के मुताबिक कृषि सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
किराए पर मिलेंगी आधुनिक सेवाएं
इन कस्टम हायरिंग सेंटरों का मकसद किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाना है। किसान अपनी जरूरत के हिसाब से सेंटर से ड्रोन और दूसरी कृषि सेवाएं किराए पर ले सकेंगे। इससे किसानों को महंगी तकनीक खरीदने के बजाय उसे किराए पर इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा।
आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी
योजना के लिए आवेदन करते समय आधार कार्ड, बैंक खाता पासबुक, खेती/फसल का विवरण, भूमि प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो और ई-मेल आईडी जैसे डॉक्यूमेंट्स जरूरी होंगे।
आवेदन और योजना से जुड़ी जानकारी के लिए किसान और इच्छुक युवा बिहार कृषि विभाग की वेबसाइट देख सकते हैं।
बिहार सरकार के मुताबिक, किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर से एक तरफ किसानों को आधुनिक खेती की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।





