भारत में दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालक किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार देसी गाय-भैंस की नस्ल सुधारने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा जिले के भिलड़ी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर देश को समर्पित किया। 127 एकड़ में फैला यह देश का पहला केंद्र है, जहां खासतौर पर कांकरेज नस्ल के पशुओं के सुधार पर काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस केंद्र से पशुओं की नस्ल सुधारने की रफ्तार 10 से 20 गुना तक बढ़ सकती है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देसी नस्लों पर होगा काम
इस केंद्र में कांकरेज नस्ल के साथ गिर, साहीवाल, मेहसाणा और जाफराबादी जैसी देसी गायों और भैंसों की नस्लों के संरक्षण और सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य अच्छी नस्ल के पशु तैयार करना और उनकी दूध उत्पादन क्षमता में सुधार करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और यहां दूध उत्पादन की रफ्तार भी दुनिया में सबसे तेज है। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के विस्तार से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और किसान परिवारों की कमाई बढ़ी है।
गाय-भैंस से रोजाना दूध उत्पादन बढ़कर 8 लीटर हुआ
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में दूध उत्पादन की बढ़ती क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2013-14 में भारत में एक गाय या भैंस से औसतन रोजाना 5 लीटर से भी कम दूध मिलता था। अब यह औसत बढ़कर करीब 8 लीटर हो गया है।
उन्होंने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधारने और बेहतर प्रजनन सुविधाएं विकसित करने से दूध उत्पादन को और बढ़ावा दिया जा सकता है। नया केंद्र इसी दिशा में काम करेगा।
दूध के साथ गोबर से भी कमाई कर सकेंगे किसान
सरकार पशुपालन को किसानों की कमाई का बेहतर जरिया बनाने के लिए दूध के साथ गोबर के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। प्रधानमंत्री ने गुजरात के थराद और राधनपुर में बनास डेयरी के दो Bio-CNG प्लांट की आधारशिला रखी। इन दोनों प्लांट में रोजाना कुल 175 टन गोबर को प्रोसेस किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान दूध के साथ गोबर से भी कमाई कर सकें, इसके लिए नई संभावनाएं तैयार की जा रही हैं। गोबर से बायोगैस, Bio-CNG और जैविक खाद बनाई जा सकती है। इससे पशुपालकों के लिए कमाई के अतिरिक्त रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी जैसी सहकारी संस्थाएं इस काम में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
50 लाख करोड़ रुपये का फायदा मिलने का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई सालों में सरकार की योजनाओं और दूसरी पहलों से देश के किसानों को कुल 50 लाख करोड़ रुपये की कमाई या बचत हुई है। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत छोटे किसानों को 4.5 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 साल में गेहूं और धान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत 24 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। खाद पर सब्सिडी देने के लिए 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पिछले 10 से 12 साल में फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में 2 लाख करोड़ रुपये दिए गए।
सोलर पंप से किसानों को डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद
प्रधानमंत्री ने पीएम-कुसुम योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत किसानों को 12 लाख सोलर पंप दिए गए हैं। इससे सिंचाई के लिए डीजल और बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
उनके मुताबिक, सोलर पंपों के इस्तेमाल से किसानों को करीब 80 करोड़ लीटर डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके अलावा, बिजली उत्पादन से भी किसानों की कमाई बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए Soil Health Card और अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता को भी जरूरी बताया।
दूध और शहद बेचकर कमाई कर रही हैं महिलाएं
प्रधानमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बनासकांठा में उनकी मुलाकात कुछ महिलाओं से हुई, जिन्होंने कहा कि वे मिलकर हर साल 2 करोड़ रुपये का दूध बेचती हैं। इसके अलावा, जिले की महिलाएं हर साल 35 लाख रुपये का शहद भी बेचती हैं।
मोदी ने कहा कि पिछले 12 साल में भारत में शहद का उत्पादन दोगुना हो गया है। भारत प्राकृतिक शहद का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। उन्होंने शहद उत्पादन बढ़ाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को अहम बताया।
कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने गुजरात में कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं की शुरुआत भी की। इनमें बनास डेयरी के सानादर स्थित फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट का विस्तार, अहमदाबाद मेट्रो का एयरपोर्ट और गिफ्ट सिटी तक विस्तार और अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे को चार लेन से बढ़ाकर आठ लेन करना शामिल है। हाईवे परियोजना पर करीब 2,600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत करीब 4,950 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 521 परियोजनाओं को देश को समर्पित किया। उन्होंने पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त के तहत करीब 19,000 करोड़ रुपये भी जारी किए।
प्रधानमंत्री ने 12 बागवानी क्लस्टर से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत भी की। ये क्लस्टर करीब 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे, जिनसे 1.3 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इनमें उत्तर गुजरात के आलू उत्पादक क्षेत्रों पर केंद्रित क्लस्टर भी शामिल हैं।





