किसानों के लिए खेती के साथ सौर ऊर्जा से कमाई का एक नया रास्ता खुलने जा रहा है। केंद्र सरकार जल्द ही PM-KUSUM योजना का दूसरा चरण यानी PM-KUSUM 2.0 लॉन्च करने वाली है। इसका मकसद गांवों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ किसानों को खेती की जमीन पर ही बिजली पैदा करने का मौका देना है।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को बताया कि PM-KUSUM 2.0 की घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण भारत में छोटे-छोटे स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल तैयार करेगी।
एक ही खेत में फसल और सोलर पैनल
PM-KUSUM 2.0 में Agrivoltaics पर खास जोर दिया जाएगा। इसमें खेत की जमीन पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं और इनके नीचे फसलों की खेती जारी रहती है। यानी किसान को खेती और सोलर पावर में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक ही जमीन से फसल और सौर ऊर्जा दोनों मिल सकेंगे।
एक अधिकारी के मुताबिक, नई योजना में 10 GW का अलग Agri-PV Component शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य फसलों के साथ सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा देना है। PM-KUSUM 2.0 का बजट भी पहली योजना के मुकाबले ज्यादा होने की उम्मीद है।
क्यों अहम है Agrivoltaics?
मंत्री ने बताया कि भारत की आबादी दुनिया की करीब 18 फीसदी है, लेकिन देश के पास दुनिया की सिर्फ 2.4 फीसदी जमीन है। वहीं, देश के 85 फीसदी से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है।
ऐसे में Agrivoltaics किसानों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है। सोलर पैनल जमीन के ऊपर लगाए जाते हैं और नीचे फसल उगाई जा सकती है। इससे किसान एक ही जमीन से खेती और सौर ऊर्जा दोनों का फायदा उठा सकते हैं।
PM-KUSUM के तहत 29 लाख पंप सोलर हुए
प्रल्हाद जोशी ने PM-KUSUM योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 29 लाख कृषि पंपों को सोलर किया जा चुका है।
पिछले साल देश में विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा से 16.3 GW बिजली क्षमता जुड़ी। इसमें PM-KUSUM से 7.6 GW और रूफटॉप सोलर से 8.7 GW क्षमता शामिल है। रूफटॉप सोलर का बड़ा हिस्सा PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत आया है, जिससे करीब 56 लाख लाभार्थी जुड़े हैं।
अलग-अलग फसलों के लिए होगी रिसर्च
सरकार Agrivoltaics को बढ़ावा देने के साथ इस पर ज्यादा रिसर्च भी करना चाहती है। इसका मकसद यह समझना है कि किस फसल, मौसम और क्षेत्र में किस तरह का सोलर सिस्टम बेहतर काम करता है।
इसी दिशा में Indo-German Cooperation on Agrivoltaics (IGCA) ने किसानों, किसान संगठनों, Renewable Energy Developers और सरकारी संस्थानों से Agrivoltaics प्रोजेक्ट्स के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रोजेक्ट्स में तकनीकी मदद, Viability Gap Funding और रिसर्च उपकरणों से जुड़ी सहायता देने की बात कही गई है।
2019 में शुरू हुई थी PM-KUSUM योजना
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी PM-KUSUM को 2019 में 34,422 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया था। इसका मकसद खेती में Renewable Energy को बढ़ावा देना, किसानों की सिंचाई लागत कम करना और मार्च 2026 तक 34,800 MW सौर क्षमता जोड़ना था।
अब PM-KUSUM 2.0 के जरिए सरकार खेती की जमीन पर फसल के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी में है। इससे किसानों के लिए खेती के अलावा ऊर्जा से कमाई का एक नया विकल्प तैयार हो सकता है।
ये भी देखें-





