देश के 100 जिलों में खेती की स्थिति सुधारने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) का पहला साल पूरा हो गया है। अब योजना के दूसरे साल में इन जिलों में खेती से जुड़े कामों को तेजी से आगे बढ़ाने और उनके नतीजे जमीन पर दिखाने पर जोर दिया जा रहा है। इस मौके पर 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री, सरकारी अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, जिला अधिकारी और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के पहले साल में मजबूत नींव तैयार करने पर ध्यान दिया गया। अब अगले साल का लक्ष्य खेती में ऐसे बदलाव लाना है, जिनका असर जमीन पर दिखाई दे और जिन्हें आंकड़ों के जरिए मापा जा सके।
खेती की पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, एक साल में ज्यादा फसलें लेने, सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने, किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने और बागवानी जैसी अधिक मूल्य वाली खेती को बढ़ावा देने पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण की सुविधाएं बेहतर बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि योजना की सफलता तभी मानी जाएगी, जब इससे किसानों की जिंदगी में बदलाव आए और उनकी आय बढ़े। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को मिलकर काम करना होगा।
100 जिलों की प्रगति पर रखी जा रही नजर
योजना में शामिल जिलों की जरूरतों के हिसाब से कृषि विकास की योजनाएं बनाई गई हैं। इसमें मिट्टी, बारिश, फसल चक्र, पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है।
योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़कर काम किया जा रहा है। जिलों की प्रगति पर 121 संकेतकों के जरिए नजर रखी जाती है। इसके लिए एक डैशबोर्ड बनाया गया है, जिस पर हर महीने जिलों की रैंकिंग भी जारी होती है।
इन जिलों को मिला बेहतर प्रदर्शन का सम्मान
कार्यक्रम में योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। बिहार के गया जिले को पहला, राजस्थान के नागौर को दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को तीसरा स्थान मिला।
इसके अलावा, कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण, भंडारण, सिंचाई, कृषि ऋण और सरकारी सेवाओं में सुधार जैसे छह क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाले 18 जिलों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में गढ़चिरोली जिले ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन, अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने बागवानी और बांका जिले ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी पहल के अनुभव साझा किए।
खाद के सही इस्तेमाल पर भी जोर
कृषि मंत्री ने बताया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को खाद का संतुलित और सही इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना है, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
योजना के दूसरे साल में सरकार का जोर इन 100 जिलों में खेती की पैदावार बढ़ाने, सिंचाई और भंडारण की सुविधाओं में सुधार करने और किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने जैसे कामों को आगे बढ़ाने पर है।





