देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती जरूरत और भारी-भरकम ईंधन आयात के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल से किसानों की कमाई बढ़ाने के साथ-साथ भारत की पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी कम की जा सकती है। गडकरी के मुताबिक, किसान सिर्फ ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि अब ‘ऊर्जादाता’ भी बन सकता है।
मध्य प्रदेश में नई सार्वजनिक बस सेवा की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को फायदा हुआ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने के बाद मक्के का भाव करीब 1,200 रुपये से बढ़कर 2,600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा है। उनके मुताबिक, यही स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का मतलब है।
एथेनॉल से लेकर हाइड्रोजन तक पर जोर
गडकरी ने कहा कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात करता है। ऐसे में देश को पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल, बिजली, हाइड्रोजन और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने बताया कि 100 फीसदी एथेनॉल पर चलने वाले Flex-Fuel Engine विकसित किए जा रहे हैं और जल्द इस तकनीक वाले वाहन भी देखने को मिलेंगे। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों पर भी काम कर रही है।
कचरे से भी बनेगा ईंधन
गडकरी ने कचरे से ईंधन बनाने की संभावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नागपुर में रोजाना करीब 28 टन CNG कचरे से बनाई जा रही है। देशभर में ऐसे करीब 4,000 प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि कचरे से ईंधन बनाने वाले ऐसे प्रोजेक्ट किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकते हैं। इससे प्रदूषण कम करने और पेट्रोलियम आयात घटाने में भी मदद मिलेगी।
गडकरी के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए अगर किसान फसलों से एथेनॉल, कचरे से CNG और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों के उत्पादन से जुड़ते हैं, तो इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ देश का आयात बिल और प्रदूषण दोनों कम किए जा सकते हैं।





