नकली और घटिया बीजों की वजह से किसानों को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार किसान अच्छी फसल की उम्मीद में महंगे बीज खरीदते हैं, लेकिन बीज खराब निकलने पर पूरी फसल प्रभावित हो जाती है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार नया Seed Bill लाने की तैयारी कर रही है। इसी सिलसिले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और प्रस्तावित कानून पर उनके सुझाव लिए।
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा Seed Act 1966 का है और Seed Control Order 1983 में आया था। समय के साथ खेती और बीजों की व्यवस्था में काफी बदलाव हुआ है, लेकिन मौजूदा कानून में कई तरह के बीज इसके दायरे से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि करीब 70 फीसदी बीज मौजूदा कानून के दायरे में नहीं आते, ऐसे में नकली और घटिया बीजों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए नया कानून जरूरी है।
सरकार ने इससे पहले नवंबर-दिसंबर 2025 में प्रस्तावित Seed Bill के ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव मांगे थे। उस दौरान किसानों और किसान संगठनों की तरफ से करीब 18 हजार सुझाव मिले थे। अब सरकार सीधे किसान संगठनों से भी चर्चा कर रही है, ताकि नए कानून में किसानों की वास्तविक समस्याओं को शामिल किया जा सके। मंत्री ने कहा कि अभी कानून लाने की कोई तय समयसीमा नहीं है और सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।
नए कानून को लेकर किसानों के अधिकारों पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। किसानों को अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों को इस्तेमाल करने, आपस में बांटने और बेचने की आजादी रहेगी। इन बीजों के लिए किसान के लिए अनिवार्य Registration की व्यवस्था नहीं होगी। अगर कोई किसान अपनी किस्म को Register कराना चाहता है तो यह उसकी इच्छा पर निर्भर होगा।
प्रस्तावित कानून में नकली और खराब बीज बेचने वालों पर कार्रवाई के लिए दंड की व्यवस्था को भी ज्यादा प्रभावी बनाने की बात कही गई है। छोटे अपराधों में पहली बार चेतावनी और दोबारा गलती करने पर ज्यादा जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे खराब बीज की जिम्मेदारी तय की जा सके और किसान तक सही बीज पहुंचे।
इसके लिए Traceability System पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे बीज की पहचान और उसके स्रोत को ट्रैक करना आसान होगा और किसान को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उसे जो बीज मिला है, वह कहां से आया है। सरकार का कहना है कि नए Seed Bill को किसानों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा और किसान संगठनों से मिले सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।





