खेती को मौसम की मार से बचाने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत और आसियान देशों ने मिलकर काम करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में हुई नौवीं आसियान-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक में खेती, खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और कृषि की नई तकनीकों को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें AI, डिजिटल खेती, स्मार्ट फार्मिंग और मजबूत सप्लाई चेन पर खास ध्यान दिया गया।
9 सितंबर 2026 को हुई इस बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और फिलीपींस के कृषि विभाग के सचिव फ्रांसिस्को पी. टियू लॉरेल ने की।
जलवायु बदलाव से निपटने पर जोर
बैठक में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन और बाढ़, सूखा जैसी चरम मौसम की घटनाओं का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। इसके अलावा खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतों और सप्लाई में होने वाली दिक्कतें भी किसानों के लिए चुनौती बन रही हैं।
ऐसे में भारत और आसियान देश मिलकर जलवायु के अनुकूल खेती, बेहतर बीज, मृदा स्वास्थ्य और कृषि तकनीक पर काम करेंगे। साथ ही खाद, बीज और कीटनाशकों की सप्लाई को मजबूत बनाने और इनकी उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
खेती में AI और डिजिटल तकनीक का बढ़ेगा इस्तेमाल
बैठक में कृषि क्षेत्र में Artificial Intelligence (AI), Internet of Things (IoT) और Machine Learning जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई। इन तकनीकों की मदद से किसानों को मौसम, मिट्टी, फसल और सिंचाई से जुड़ी बेहतर जानकारी मिल सकती है।
इसके साथ ही स्मार्ट खेती, सटीक कृषि और डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों के बीच किसानों और कृषि विशेषज्ञों के अनुभव साझा करने पर भी जोर दिया गया।
किसानों के बीच बढ़ेगा ज्ञान
भारत और आसियान देशों के किसान एक-दूसरे से खेती के नए तरीकों की जानकारी साझा करेंगे। इसके लिए किसान संगठनों, सहकारी समितियों, कृषि संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।
बैठक में कृषि शिक्षा और शोध को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। 2024 में शुरू की गई आसियान-भारत फैलोशिप के तहत आसियान देशों के छात्रों को कृषि और इससे जुड़े विषयों में पढ़ाई के लिए पांच साल में 50 मास्टर फैलोशिप देने की योजना भी है।
बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर
बैठक में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान और खाने की बर्बादी को कम करने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग और संरक्षण तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी कीमत बढ़ाने और कृषि उत्पादों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स पर भी काम किया जाएगा।
2026-2030 के लिए नई योजना पर काम
बैठक में 2026 से 2030 तक कृषि और वानिकी में सहयोग के लिए नई कार्य योजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसमें खाद्य सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक, रिसर्च, किसानों के बीच आदान-प्रदान और ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।
नई योजना में कम पानी और कम कार्बन उत्सर्जन वाली खेती, जलवायु-प्रतिरोधी फसलें, मृदा स्वास्थ्य, कृषि वानिकी और मजबूत खाद्य आपूर्ति श्रृंखला जैसी पहलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि इन योजनाओं को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जिनका सीधा फायदा किसानों तक पहुंचे और जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
भारत और आसियान देशों के बीच कृषि एवं वानिकी पर अगली यानी 10वीं मंत्रिस्तरीय बैठक 2028 में आयोजित करने पर भी सहमति बनी।





