भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा। जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से करीब 12.6% कम बारिश हुई। IMD के मुताबिक, इस साल देशभर में करीब 759.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिमी होती है। यह 2015 के बाद सबसे कम बारिश है।
IMD के मुताबिक, इस बार कमजोर मानसून की बड़ी वजह El Nino रहा। इसका असर खासकर दक्षिण और पूर्वी भारत में ज्यादा देखने को मिला। दक्षिण भारत में बारिश सामान्य की सिर्फ 76% और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में 74% रही।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में इस सीजन में 1,016.3 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद सबसे कम है। वहीं दक्षिण प्रायद्वीप में 542 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद चौथी सबसे कम और 2001 के बाद दूसरी सबसे कम बारिश है।
खेती पर भी पड़ा असर
कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई। 25 सितंबर तक करीब 110.7 मिलियन हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई, जो पिछले साल की तुलना में सिर्फ 1.2% कम है। हालांकि, धान, कपास और मक्का जैसी फसलों पर कम बारिश का असर पड़ा है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसलों की अंतिम पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्से, तेलंगाना और राजस्थान कम बारिश से ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
दक्षिण भारत के जलाशयों में भी कम पानी
कम बारिश का असर जलाशयों पर भी पड़ा है। 24 सितंबर तक दक्षिण भारत के जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का करीब 50% पानी ही था। वहीं देशभर के जलाशयों में पानी का स्तर करीब 79% रहा।
IMD के मुताबिक, इस मानसून सीजन में कुल 14 कम दबाव वाले सिस्टम बने, जिनमें 6 डिप्रेशन थे। इस दौरान 77 दिन तक ऐसे सिस्टम सक्रिय रहे, जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि करीब 57 दिन रहती है।
अक्टूबर में भी कम बारिश का अनुमान
IMD ने अक्टूबर को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ाने वाला अनुमान दिया है। विभाग के मुताबिक, अक्टूबर में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जो सामान्य बारिश की 85% से भी कम रह सकती है।
अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भी देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से ज्यादा हो सकती है।
IMD के मुताबिक, El Nino नवंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसके बाद मार्च से धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है।





