भारत और घाना ने खेती के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता किया है। इसके तहत भारत का Indian Council of Agricultural Research (ICAR) और घाना का Crops Research Institute (CSIR-CRI) मिलकर कृषि रिसर्च, नई तकनीक और किसानों की क्षमता बढ़ाने पर काम करेंगे। यह समझौता पांच साल के लिए है।
इस समझौते के तहत दोनों देश फसलों की नई किस्मों, कृषि तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी को साझा करेंगे। साथ ही वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों का आपस में आदान-प्रदान भी होगा। इस काम में घाना की Arima Farms Ltd. को कुछ रिसर्च और तकनीक को जमीन पर उतारने के लिए कमर्शियल पार्टनर बनाया गया है।
टमाटर की खेती पर खास फोकस
सहयोग के पहले चरण में सब्जियों की खेती, खासकर टमाटर पर ध्यान दिया जाएगा। ICAR घाना में ऐसी टमाटर की किस्मों और तकनीकों को पहुंचाने में मदद करेगा, जिनसे वहां टमाटर का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
कसावा और याम की प्रोसेसिंग पर भी काम
भारत और घाना कसावा, याम और दूसरी कंद वाली फसलों की प्रोसेसिंग और Value Addition पर भी मिलकर काम करेंगे। इसका मकसद इन फसलों से जुड़े कारोबार और पूरी Agricultural Value Chain को मजबूत करना है।
फसल खराब होने से बचाने पर जोर
दोनों देश फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भी काम करेंगे। इसके लिए Cold Storage, Refrigerated Transportation, Sorting, Grading और Processing जैसी तकनीकों पर ट्रेनिंग और तकनीकी मदद दी जाएगी।
इसके अलावा दोनों देशों के वैज्ञानिक Research Projects पर साथ काम करेंगे और बीज, Breeding Material, वैज्ञानिक जानकारी और खेती की तकनीक एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। इस पूरे सहयोग की निगरानी के लिए Joint Working Group बनाया जाएगा, जो समय-समय पर काम की समीक्षा करेगा।
इस समझौते का मकसद रिसर्च और नई कृषि तकनीक को खेतों तक पहुंचाना, उत्पादन बढ़ाना, फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और घाना में खेती से जुड़े लोगों की आमदनी और आजीविका को बेहतर बनाने में मदद करना है।





