अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए गोदामों में कीटों से बचाव बेहद जरूरी है। लेकिन इसके लिए लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे रसायनों के ज्यादा इस्तेमाल से अब कीटों में Resistance बढ़ रही है। ऐसे में ICAR और FCI अब अनाज भंडारण में कीट नियंत्रण के नए तरीके आजमाने जा रहे हैं, जिनमें Nitrogen और Carbon Dioxide (CO₂) जैसी गैसों का इस्तेमाल किया जाएगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने Food Corporation of India (FCI) के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत FCI के भंडारण केंद्रों में अनाज को कीटों से बचाने के लिए इन वैकल्पिक तरीकों का ट्रायल किया जाएगा। इसका मकसद पुराने रसायनों पर निर्भरता कम करना और अनाज के सुरक्षित भंडारण के लिए बेहतर तरीके तलाशना है।
पुराने रसायनों से बढ़ रही परेशानी
अभी FCI के गोदामों में रखे अनाज को कीटों से बचाने के लिए Aluminium Phosphide (ALP) और Malathion का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। लेकिन इन रसायनों के लगातार और बार-बार इस्तेमाल से कई राज्यों में कीटों में इनके खिलाफ Resistance बढ़ गई है। कुछ प्रमुख राज्यों में यह Resistance 72 से 100 फीसदी तक पहुंचने की बात कही गई है।
इस वजह से कीटों को नियंत्रित करने के लिए बार-बार Fumigation करना पड़ता है, जिससे काम और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। साथ ही, इन रसायनों के इस्तेमाल से गोदामों में काम करने वाले कर्मचारियों की सेहत और पर्यावरण पर भी खतरा होने की चिंता है।
तीन तरीकों का होगा ट्रायल
पहले चरण में ICAR और FCI तीन प्रमुख तरीकों का ट्रायल करेंगे।
- Metal Silos में रखे गेहूं में Nitrogen Gas Fumigation का इस्तेमाल किया जाएगा।
- गोदामों में बोरियों में रखे गेहूं और चावल में CO₂ और Phosphine Gas के संयुक्त इस्तेमाल का ट्रायल होगा।
- Hermetic Covers में रखे गेहूं और चावल में CO₂ Fumigation का इस्तेमाल करके देखा जाएगा।
इसका पहला चरण दो साल तक चलेगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि ये तरीके अनाज को भंडारण के दौरान कीटों से बचाने में कितने कारगर हैं।
इसके बाद दूसरे चरण में अलग-अलग Agro-climatic Zones में एक साल का Multi-location Trial किया जाएगा। इसके आधार पर अलग-अलग इलाकों और मौसम के हिसाब से अनाज भंडारण के लिए Standard Operating Procedures (SOPs) तैयार की जाएंगी।





