कमजोर मानसून के कारण गुजरात के कई हिस्सों में बारिश की कमी से जूझ रहे किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखाग्रस्त घोषित किया। इन जिलों में राहत पैकेज 1 नवंबर से लागू होगा।
राज्य में इस मानसून सीजन में सामान्य बारिश का करीब 89 प्रतिशत पानी बरसा, लेकिन पश्चिमी गुजरात के इन जिलों में बारिश की भारी कमी रही। सरकार के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक 30 साल के औसत की तुलना में देवभूमि द्वारका में 83.5 प्रतिशत, पोरबंदर में 69.1 प्रतिशत, जामनगर में 56.7 प्रतिशत और कच्छ में 42.4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
किसानों को फसल नुकसान पर मुआवजा
सूखाग्रस्त घोषित चारों जिलों के किसानों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की सहायता मिलेगी। इसकी अधिकतम सीमा दो हेक्टेयर प्रति किसान होगी।
पशुपालकों को राहत देने के लिए सूखाग्रस्त तालुकों में पशु शिविर भी चलाए जाएंगे। इन शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए दो महीने तक SDRF से प्रतिदिन ₹80 प्रति पशु की सहायता दी जाएगी। इसके बाद पशु शिविरों का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था
सरकार के मुताबिक, गुजरात में अब तक करीब 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बांटा जा चुका है। सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर आपूर्ति बनाए रखने के लिए चारे की खरीद भी शुरू कर दी गई है।
सूखाग्रस्त इलाकों में 150 दिन का रोजगार
फसल खराब होने से ग्रामीण इलाकों में मजदूरी के अवसर भी कम हो सकते हैं। इसे देखते हुए सूखाग्रस्त तालुकों में VB-G RAM-G योजना के तहत 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
रबी की सिंचाई के लिए बांधों से पानी
सरकार ने राहत पैकेज के साथ रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, गुजरात के 206 प्रमुख बांधों में फिलहाल 66 प्रतिशत जल भंडारण है। रबी सीजन में 76 बांधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी देने की योजना बनाई गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि 30 जून 2027 तक पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी का भंडार सुरक्षित रखा जाएगा।
सिंचाई के लिए उत्तर गुजरात के 11, मध्य गुजरात के 12, दक्षिण गुजरात के नौ, सौराष्ट्र के 39 और कच्छ के पांच बांधों से पानी देने की योजना है। इनमें धारोई, दांतीवाड़ा, करजन, पानम, उकाई, काकरापार, दमनगंगा, शेत्रुंजी, ब्राह्मणी और मच्छू जैसे बांध शामिल हैं।
पानी की उपलब्धता के आधार पर एक से चार बार सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।





