नई दिल्ली। देश को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार तिलहन और ऑयल पाम की खेती को तेजी से बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को 69.7 मिलियन टन तक पहुंचाना है। इसके लिए किसानों को मुफ्त बीज, नई किस्में, प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों की सुविधा दी जा रही है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) के तहत देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज मुफ्त दिए जा रहे हैं और बेहतर खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके अलावा तेल मिलों, बीज भंडारण और अन्य जरूरी ढांचे के विकास पर भी काम किया जा रहा है।
तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार, देश में तिलहन उत्पादन 2023-24 के 39.67 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 43.06 मिलियन टन (तीसरे अग्रिम अनुमान) हो गया है।
वर्ष 2025-26 में मिशन के तहत 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराए गए, जबकि वार्षिक लक्ष्य 10 लाख हेक्टेयर का था। इसके साथ ही 60 सीड हब और 50 विशेष बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है।
खाद्य तेल आयात अब भी बड़ा
सरकार ने बताया कि 2024-25 के दौरान भारत ने 160.72 लाख टन खाद्य तेल आयात किया। इसमें 75.17 लाख टन पाम तेल शामिल था, जो कुल खाद्य तेल आयात का 46.77% है।
ऑयल पाम की खेती का भी विस्तार
सरकार राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) के तहत 15 राज्यों में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दे रही है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता के पौधे, अंतरवर्ती फसलों के लिए सहायता, सिंचाई, कृषि मशीनें और चार साल की शुरुआती अवधि के लिए आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
2021-22 से 2025-26 के बीच 2.73 लाख हेक्टेयर नया क्षेत्र ऑयल पाम की खेती के तहत जोड़ा गया है। इसके साथ देश में ऑयल पाम का कुल रकबा बढ़कर 6.40 लाख हेक्टेयर हो गया है।
इसी अवधि में 114.66 लाख टन फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) का उत्पादन हुआ, जिससे 20.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल (CPO) तैयार किया गया। देश में इस समय 27 ऑयल पाम प्रोसेसिंग मिलें संचालित हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि ऑयल पाम किसानों को सहायता देने के लिए व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP) योजना के तहत अब तक 9,244 किसानों को 18.90 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना और देश को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।





