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खाद की बिक्री 28% घटी, सरकार को ₹1,470 करोड़ की बचत, जानिए क्या है वजह

रबी कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि युद्ध से पहले 45 किलो यूरिया की एक बोरी पर सरकार का सब्सिडी बोझ ₹1,350 था, जो अब बढ़कर ₹2,775 हो गया है। यानी इसमें करीब 106 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 50 किलो DAP पर सब्सिडी का बोझ ₹2,102 से बढ़कर ₹3,523 हो गया है, जो करीब 61 फीसदी ज्यादा है।

Pooja Rai

Pooja Rai·05 Oct 2026

खाद की बिक्री 28% घटी, सरकार को ₹1,470 करोड़ की बचत, जानिए क्या है वजह

खाद के ज्यादा और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए खरीफ 2026 में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 222 जिलों में Fertilisers Sales (FFS) Framework लागू किया गया। इसके तहत किसानों को उनकी जमीन और चुनी गई फसल के हिसाब से ही सब्सिडी वाली खाद खरीदने की सुविधा दी गई। इसका असर यह हुआ कि इन जिलों में खाद की बिक्री 28 फीसदी घट गई और सरकार को करीब ₹1,470 करोड़ की बचत हुई।

खास बात यह है कि खाद खरीदने वाले किसानों की संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है। खरीफ 2026 में इन जिलों में 46.97 लाख किसानों ने खाद खरीदी, जबकि एक साल पहले यह संख्या 44.55 लाख थी। लेकिन खाद की कुल बिक्री 18.30 लाख टन से घटकर 13.35 लाख टन रह गई।

हाल ही में हुई वार्षिक रबी कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे बड़े कृषि राज्यों में खाद की बिक्री में 75 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई। हालांकि, कुछ राज्यों में कम बारिश को भी खाद की कम बिक्री की एक वजह बताया गया है।

इस व्यवस्था में खाद की बिक्री को ऐप और ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा गया है। किसानों को खाद लेने के लिए टोकन दिया जाता है, जिससे दुकानों के बाहर लंबी लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। करीब 77 फीसदी किसानों के पास डिजिटल Farmer ID (FID) थी, जबकि 15 फीसदी किसान किराए पर जमीन लेकर खेती करने वाले थे।

वहीं, पंजाब ने इस पायलट को लागू नहीं किया, जबकि मध्य प्रदेश ने किसानों के विरोध के बाद इसे बंद कर दिया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इसे लागू करना राज्यों के लिए जरूरी नहीं है, राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला ले सकते हैं।

सरकार का कहना है कि रासायनिक खाद के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को कम करना जरूरी है, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और सब्सिडी वाली खाद का गैर-कृषि कामों में इस्तेमाल रोका जा सके। राज्यों से खाद के संतुलित इस्तेमाल के साथ जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है।

खाद पर बढ़ रहा सब्सिडी का बोझ

खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने से सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ रहा है। सरकार के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा हो सकती है।

रबी कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि युद्ध से पहले 45 किलो यूरिया की एक बोरी पर सरकार का सब्सिडी बोझ ₹1,350 था, जो अब बढ़कर ₹2,775 हो गया है। यानी इसमें करीब 106 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 50 किलो DAP पर सब्सिडी का बोझ ₹2,102 से बढ़कर ₹3,523 हो गया है, जो करीब 61 फीसदी ज्यादा है।

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— खाद की बिक्री 28% घटी, सरकार को ₹1,470 करोड़ की बचत, जानिए क्या है वजह

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