केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय की पहली मासिक समीक्षा बैठक में किसानों से जुड़ी कई योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने का फैसला लिया गया। इसके तहत किसानों को मिट्टी की जांच, पराली न जलाने और खाद का संतुलित इस्तेमाल करने के बारे में जागरूक किया जाएगा। कृषि वैज्ञानिक और मैदानी कर्मचारी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे।
10.77 करोड़ किसानों की बनी Farmer ID
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत अब तक 10.77 करोड़ से ज्यादा किसानों की Farmer ID बनाई जा चुकी है। सरकार के मुताबिक इससे किसानों को सब्सिडी, KCC, MSP खरीद, फसल बीमा और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सीधे और आसानी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
फसल बीमा में 23% बढ़ा किसानों का नामांकन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों का नामांकन पिछले खरीफ सीजन के 2.30 करोड़ से बढ़कर इस साल 2.83 करोड़ हो गया है। यानी इसमें करीब 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को किसानों के बीमा क्लेम का जल्द और पारदर्शी तरीके से निपटारा करने के निर्देश दिए।
दलहन और तिलहन उत्पादन लक्ष्य से आगे
सरकार के मुताबिक 2025-26 में देश में 274.09 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 266 लाख टन था। वहीं, तिलहन का उत्पादन 430.59 लाख टन रहा, जो 427 लाख टन के लक्ष्य से ज्यादा है। सरकार का कहना है कि इससे दाल और खाद्य तेल के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
प्राकृतिक खेती से जुड़े 27.32 लाख किसान
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है। किसानों को तकनीकी मदद देने के लिए 33 हजार से ज्यादा कृषि सखियां और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स तैनात किए गए हैं।
FPO से 30 लाख से ज्यादा किसान जुड़े
किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए चल रही 10,000 FPO योजना के तहत 30.11 लाख किसान FPO से जुड़ चुके हैं। सरकार के अनुसार इससे छोटे किसानों को मिलकर बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।
खेतों में पहुंचेगा कृषि विज्ञान
कृषि मंत्री ने KVK, ‘आत्मा’ और कृषि विश्वविद्यालयों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को सीधे किसानों के खेत तक पहुंचाना है, ताकि किसान नई तकनीक और खेती के बेहतर तरीकों का इस्तेमाल कर सकें।





