नई दिल्ली। देश में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कई योजनाओं पर काम कर रही है। लोकसभा में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, बेहतर नस्ल के पशु तैयार करने, पशु रोगों की रोकथाम और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इन योजनाओं के जरिए लाखों किसानों और पशुपालकों को लाभ मिल रहा है।
सरकार के मुताबिक, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत जून 2026 तक 36,611 नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाई गई हैं, जबकि 34,557 ग्राम स्तरीय दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत किया गया है। इसके अलावा देशभर में 168 लाख लीटर प्रतिदिन दूध शीतलन (चिलिंग) क्षमता विकसित की गई है और 76,748 दूध गुणवत्ता जांच उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकार ने बताया कि पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत 418 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे डेयरी उद्योग को मजबूत करने के साथ किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
नस्ल सुधार पर भी जोर
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत पिछले पांच वर्षों में 17.27 करोड़ से अधिक कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) किए गए हैं, जिससे करीब 5.98 करोड़ पशुपालकों को लाभ मिला है। इसके अलावा 47,687 MAITRI तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया, 24 आईवीएफ लैब, 48 वीर्य केंद्र और 28 बछिया पालन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
चारा उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत 4,084 नस्ल गुणन फार्मों को मंजूरी दी गई है। साथ ही 1.61 लाख मीट्रिक टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन किया गया है और 204 साइलेज एवं संपूर्ण मिश्रित राशन इकाइयों को मंजूरी मिली है।
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 4,291 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 2,956.79 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के लिए 1,356.53 करोड़ रुपये की सब्सिडी स्वीकृत की गई है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 21,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे और 91,000 किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
पशु रोगों की रोकथाम पर फोकस
सरकार ने बताया कि पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत खुरपका-मुंहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) और क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
इसके अलावा जून-जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर पर पशुजन्य रोग मॉक ड्रिल आयोजित की गई। सरकार के अनुसार, इस अभ्यास से पशु रोगों की निगरानी, जैव सुरक्षा, प्रयोगशाला व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि दूध खरीद की कीमतें डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरियां बाजार की स्थिति के आधार पर तय करती हैं। सरकार को ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जिससे यह संकेत मिले कि किसानों को दूध का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है।





