News Potli
न्यूज़ पोटलीभारत के किसानों और गाँवों की आवाज़
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • इंटरव्यू
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. सरकारी योजना
  3. पराली से प्रदूषण नहीं, कमाई का जरिया बनाने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश
सरकारी योजना

पराली से प्रदूषण नहीं, कमाई का जरिया बनाने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश

पराली की समस्या कम करने के लिए धान की ऐसी किस्मों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई, जो कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं। कृषि मंत्री ने पूसा-44 जैसी लंबी अवधि वाली किस्मों के बजाय पूसा 2090 और PR126 जैसी कम अवधि वाली किस्मों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

News Potli

News Potli·News Potli Desk·14 Oct 2026

पराली से प्रदूषण नहीं, कमाई का जरिया बनाने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश

धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने की चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों को पराली प्रबंधन के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि किसानों को सिर्फ पराली जलाने से रोकना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें इसके निपटारे के सस्ते और आसान विकल्प भी देने होंगे। पराली का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने, पशुओं के चारे, बिजली और बायो-CNG जैसे ईंधन तैयार करने में किया जा सकता है।

इसी मुद्दे पर 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत प्रमुख राज्यों में पराली प्रबंधन की स्थिति पर चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और खेतों में जाकर काम की निगरानी करें।

हरियाणा और यूपी में पराली जलाने की घटनाएं घटीं

बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 के बीच पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत कम हुईं। पंजाब में भी कुछ कमी दर्ज की गई।

वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने पर चिंता जताई गई। कृषि मंत्री ने इन राज्यों को प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान करके विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान की कटाई अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं कम हुई हैं, वहां भी निगरानी में ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

पराली प्रबंधन की मशीनें खेतों में चलें, सिर्फ कागजों में नहीं

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली को खेत से हटाने या मिट्टी में मिलाने के लिए किसानों को मशीनों की जरूरत होती है। केंद्र सरकार अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करा चुकी है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें भी दी गई हैं।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई मशीनें उपलब्ध कराने के साथ पुरानी और खराब पड़ी मशीनों की भी मरम्मत कराई जाए। इसके अलावा, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) को सक्रिय किया जाए, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी किराये पर कम खर्च में मशीनें ले सकें।

पराली से खाद, बिजली और बायो-CNG बनाने पर जोर

सरकार का जोर पराली को जलाने के बजाय उसका इस्तेमाल करने पर है। कृषि मंत्री ने कहा कि पराली को खेत में मिलाने से जैविक खाद तैयार हो सकती है। वहीं, खेत से बाहर निकाली गई पराली से बिजली, बायो-CNG और बायो-इथेनॉल बनाया जा सकता है।

उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि किसानों को थर्मल पावर प्लांट, बायो-CNG और बायो-इथेनॉल बनाने वाले उद्योगों से जोड़ने की व्यवस्था की जाए, ताकि पराली की खरीद और आपूर्ति का रास्ता तैयार हो सके। जिन इलाकों में सूखे की स्थिति है, वहां पराली को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया।

कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवों और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए पराली को किसान की अतिरिक्त कमाई का जरिया बनाने की जरूरत है।

पराली प्रबंधन के लिए राज्यों को हजारों करोड़ रुपये की मदद

बैठक में बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत केंद्र सरकार ने 2018-19 से 2025-26 के बीच राज्यों को कुल 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़ रुपये, हरियाणा को 1,171.71 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपये दिए गए।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 592.57 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से 430.87 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

कृषि मंत्री ने राशि के इस्तेमाल में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब सरकार से पहले जारी की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जल्द भेजने को कहा, ताकि योजना की अगली किस्त जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों को बढ़ावा

पराली की समस्या कम करने के लिए धान की ऐसी किस्मों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई, जो कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं। कृषि मंत्री ने पूसा-44 जैसी लंबी अवधि वाली किस्मों के बजाय पूसा 2090 और PR126 जैसी कम अवधि वाली किस्मों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

ऐसी किस्मों की खेती से धान की कटाई जल्दी हो सकती है और किसानों को गेहूं जैसी अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करने का ज्यादा समय मिल सकता है।

सैटेलाइट के साथ खेतों में भी होगी निगरानी

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई दोनों तेज करनी होंगी। उन्होंने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद जैसे जिलों पर खास नजर रखने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट से मिलने वाले आंकड़ों के साथ जमीन पर भी जांच होनी चाहिए। खासकर दोपहर 3 बजे के बाद, जब सैटेलाइट निगरानी में अंतराल रहता है, उस दौरान स्थानीय टीमें और फ्लाइंग स्क्वॉड खेतों में गश्त करें।

पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि पराली जलाने से जुड़े आंकड़ों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के साथ जोड़कर निगरानी बेहतर बनाई जाए। जिला अधिकारियों को फसल कटाई के समय का अनुमान लगाने और मौसम की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश भी दिए गए।

सरकार का कहना है कि पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए किसानों को मशीनें, सस्ते विकल्प और पराली का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों से जुड़ने के मौके उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

News Potli.
Clip & Share
“

— पराली से प्रदूषण नहीं, कमाई का जरिया बनाने पर जोर, केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
Stubble Management in IndiaBhupender YadavStubble BurningStubble Management Machines Shivraj Singh ChouhanCrop Residue Management Scheme Bio-CNG from Stubble
News Potli

About the Author

News Potli

News Potli Desk

Related Coverage

और पढ़ें

 कृषि मशीनीकरण पर सरकार का जोर, लघु और सीमांत किसानों को फायदा
सरकारी योजना

कृषि मशीनीकरण पर सरकार का जोर, लघु और सीमांत किसानों को फायदा

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत साल 2014-15 से कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन (SMAS) के तहत उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, एफपीओ, एसएचजी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

News Potli·
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने जारी किया बड़ा यूरिया टेंडर
सरकारी योजना

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने जारी किया बड़ा यूरिया टेंडर

धान बुवाई से पहले सरकार ने बढ़ाई खाद की खरीद

News Potli·
100 जिलों में खेती सुधारने पर जोर, PM धन-धान्य कृषि योजना का दूसरा साल शुरू
सरकारी योजना

100 जिलों में खेती सुधारने पर जोर, PM धन-धान्य कृषि योजना का दूसरा साल शुरू

कार्यक्रम में योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। बिहार के गया जिले को पहला, राजस्थान के नागौर को दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को तीसरा स्थान मिला।

Pooja Rai·13 Oct 2026
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs