बांस की खेती किसानों के लिए कमाई का एक अतिरिक्त जरिया बन सकती है। इसका इस्तेमाल फर्नीचर, हस्तशिल्प, निर्माण सामग्री और कई तरह के उत्पाद बनाने में होता है। ऐसे में बांस की मांग को देखते हुए इसकी खेती को बढ़ावा देना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। इसी दिशा में बिहार सरकार राज्य के 21 जिलों में बांस की खेती को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए ₹2.39 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। योजना के तहत किसानों को बांस की खेती से जुड़ा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
बिहार के किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
योजना के तहत किसानों को बांस की खेती करने के तरीके और इससे जुड़ी तकनीकी जानकारी दी जाएगी। इससे किसानों को सही पौधों के चयन, रोपाई और खेती के प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी और योजना के तहत कितने क्षेत्र में बांस लगाया जाएगा, अभी इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
भारत में 1.39 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बांस
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के अनुसार, भारत में करीब 1.396 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बांस पाया जाता है। बांस की विविधता के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश में बांस की 136 प्रजातियां बताई गई हैं, जिनमें 125 स्वदेशी और 11 विदेशी प्रजातियां हैं।
वहीं, भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) की India State of Forest Report 2023 के अनुसार, देश के वन क्षेत्रों में बांस वाले क्षेत्र का अनुमान 1,54,670 वर्ग किलोमीटर लगाया गया है। यह 2021 के आकलन से 5,227 वर्ग किलोमीटर अधिक है।
किस राज्य में सबसे ज्यादा बांस पाया जाता है?
भारतीय वन सर्वेक्षण की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बांस वाला क्षेत्र सबसे ज्यादा 20,421 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में 18,424 वर्ग किलोमीटर, महाराष्ट्र में 13,572 वर्ग किलोमीटर और ओडिशा में 12,328 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बांस पाया जाता है।
बांस से कैसे बढ़ सकती है किसानों की कमाई?
बांस का इस्तेमाल फर्नीचर, हस्तशिल्प, निर्माण सामग्री और कई तरह के औद्योगिक उत्पाद बनाने में किया जाता है। इसकी खेती से किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प मिल सकता है। साथ ही, बांस की कटाई, प्रसंस्करण और उत्पाद बनाने से जुड़े काम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।
केंद्र सरकार का राष्ट्रीय बांस मिशन भी बांस की खेती के साथ-साथ नर्सरी, प्रसंस्करण, बाजार और बांस से बने उत्पादों को बढ़ावा देने पर काम करता है।
बिहार में इस योजना का असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसानों को प्रशिक्षण और पौधों की उपलब्धता के साथ बांस बेचने के लिए बाजार कितना मिलता है। अगर खेती से लेकर बिक्री तक की व्यवस्था मजबूत होती है, तो बांस किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर बनाने में मददगार हो सकता है।





