बिहार में किसानों को खाद खरीदने के लिए अब पहले जैसी भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। सरकार खाद की बिक्री को डिजिटल करने जा रही है, ताकि किसान को सही मात्रा में और तय कीमत पर खाद मिल सके और कालाबाजारी पर भी रोक लगाई जा सके। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इसके तहत किसान QR कोड के जरिए अधिकृत खाद विक्रेता से खाद खरीद सकेंगे।
कृषि भवन में आयोजित 'खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ' कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने कहा कि खाद किसानों के लिए बेहद जरूरी इनपुट है। अगर खाद समय पर और उचित कीमत पर मिलेगी, तभी किसान अपनी फसल को सही समय पर बचा और तैयार कर पाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने खाद की खरीद-बिक्री को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने की व्यवस्था तैयार की है।
खाद बिक्री के लिए तैयार किया गया FSAS सिस्टम
कृषि विभाग ने FSAS (Fertilizer Sales and Allocation System) तैयार किया है। इसे iFMS और एग्री स्टैक से जोड़ा गया है। इसका फायदा यह होगा कि किसान को कितनी खाद की जरूरत है, दुकानदार के पास कितना स्टॉक है और कितनी खाद बेची गई, इसकी जानकारी डिजिटल तरीके से दर्ज रहेगी।
इससे सरकार के लिए खाद के स्टॉक और बिक्री पर नजर रखना आसान होगा। साथ ही खाद की जमाखोरी या तय कीमत से ज्यादा दाम पर बिक्री जैसी गड़बड़ियों को पकड़ने में भी मदद मिलेगी।
QR कोड से कैसे मिलेगी खाद?
जिन किसानों की जमीन फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज है, उनकी जानकारी फार्मर आईडी के जरिए सिस्टम में मिल जाएगी। वहीं, जिन किसानों की जमीन अभी फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज नहीं है, वे FSAS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
रजिस्ट्रेशन के दौरान किसान को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी जैसे खाता, खसरा, रकबा और कौन-सी फसल लगी है, इसकी जानकारी देनी होगी। इसके बाद फसल और जमीन के हिसाब से खाद की जरूरत का आकलन किया जाएगा। यह जरूरत ICAR की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएगी।
इसके बाद किसान को एक QR कोड मिलेगा। यह QR कोड तीन दिन तक मान्य रहेगा। किसान इसी QR कोड में दिए गए अधिकृत विक्रेता के यहां जाकर भुगतान करने के बाद खाद खरीद सकेगा।
पहले दो जिलों में हुआ ट्रायल
डिजिटल खाद बिक्री व्यवस्था को सीधे पूरे बिहार में लागू नहीं किया गया। इसका पहले वैशाली और शेखपुरा में पायलट ट्रायल किया गया। ट्रायल के नतीजों के बाद अब इसे दूसरे जिलों में भी लागू करने की तैयारी है।
सरकार के मुताबिक, 1 सितंबर से यह व्यवस्था 19 जिलों में लागू होगी, जबकि 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में डिजिटल तरीके से खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी।
दुकानदारों के स्टॉक पर भी रहेगी नजर
नई व्यवस्था में सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड देखना ही काफी नहीं होगा। कृषि अधिकारियों को दुकानों और खेतों में जाकर भी स्थिति की जांच करनी होगी। कृषि मंत्री ने जिला कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खाद की उपलब्धता और वास्तविक स्टॉक की नियमित निगरानी करें।
अगर किसी दुकानदार द्वारा तय कीमत से ज्यादा पैसा लेने, खाद की जमाखोरी करने या बिक्री में किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विक्रेताओं को भी नई व्यवस्था के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि किसानों को खाद लेने में परेशानी न हो।
किसानों को भी समझाई जाएगी पूरी प्रक्रिया
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे जरूरी बात यह होगी कि किसानों को इसकी सही जानकारी हो। इसके लिए किसानों को फार्मर आईडी, रजिस्ट्रेशन, QR कोड और खाद खरीदने की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा।
सरकार का मकसद साफ है कि किसान को खाद के लिए बार-बार दुकान या सरकारी दफ्तर के चक्कर न लगाने पड़ें। डिजिटल सिस्टम के जरिए खाद की जरूरत पहले से तय हो और किसान को अधिकृत दुकान से निर्धारित मात्रा और तय कीमत पर खाद मिल जाए।





