केला देश में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में शामिल है। सस्ता होने के साथ-साथ इसमें पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं, इसलिए इसकी मांग सालभर बनी रहती है। फल के तौर पर खाने के अलावा इसका इस्तेमाल कई तरह के खाद्य उत्पादों में भी किया जाता है। ऐसे में केले की बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है। इसी को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार टिश्यू कल्चर तकनीक से केले की खेती का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार किसानों को टिश्यू कल्चर पौधे लगाने के लिए प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपये तक का अनुदान भी दे रही है।
बिहार में केले की खेती का बढ़ रहा दायरा
बिहार देश के प्रमुख केला उत्पादक राज्यों में शामिल है। भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (IASRI) के 2025 डेटा बुक के मुताबिक 2024-25 में राज्य में करीब 42.69 हजार हेक्टेयर में केले की खेती हुई और करीब 19.21 लाख टन उत्पादन हुआ। यह देश के कुल केला उत्पादन का लगभग 5 फीसदी है। बिहार में वैशाली, भागलपुर, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और समस्तीपुर प्रमुख केला उत्पादक जिले माने जाते हैं। अब सरकार टिश्यू कल्चर तकनीक के जरिए राज्य के सभी 38 जिलों में केले की खेती का क्षेत्र बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक?
टिश्यू कल्चर एक ऐसी तकनीक है, जिसमें केले के स्वस्थ पौधे के छोटे से हिस्से से प्रयोगशाला में कई नए पौधे तैयार किए जाते हैं। इन पौधों को अच्छी तरह तैयार करने के बाद खेत में लगाया जाता है। टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे एक जैसे और स्वस्थ होते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर मिलने की संभावना रहती है।
70 हजार रुपये तक अनुदान
कृषि मंत्री के अनुसार, टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार केले के पौधे लगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। यह राशि दो किस्तों में मिलेगी। पहली किस्त में 42 हजार रुपये और दूसरी किस्त में पौधों के जीवित रहने के आधार पर 28 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
इस योजना के तहत किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) और अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) जमीन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
टिश्यू कल्चर क्यों फायदेमंद?
टिश्यू कल्चर से तैयार पौधे आमतौर पर स्वस्थ और एक समान होते हैं। इससे खेत में पौधों की बढ़वार एक जैसी रहने और अच्छी गुणवत्ता के केले का उत्पादन लेने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि सरकार किसानों को इस आधुनिक तकनीक से केले की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
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