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बिहार में किसान बनेंगे एक- दूसरे के मददगार, FPO के माध्यम से बिकेगा खाद-बीज, बिहार सरकार का फैसला

बिहार में किसानों को खाद और बीज खरीदने में समस्याओं का सामना ना करना पड़े इसके लिए बिहार सरकार ने एक फैसला लिया है. इस फैसले के अनुसार अब FPO यानी किसान उत्पाद संगठन भी किसानों को खाद- बीज और खेती से ज

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Rohit·Correspondent·16 Aug 2024· 3 min read

बिहार में किसान बनेंगे एक- दूसरे के मददगार, FPO के माध्यम से बिकेगा खाद-बीज, बिहार सरकार का फैसला

बिहार में किसान बनेंगे एक- दूसरे के मददगार, FPO के माध्यम से बिकेगा खाद-बीज, बिहार सरकार का फैसला

बिहार में किसानों को खाद और बीज खरीदने में समस्याओं का सामना ना करना पड़े इसके लिए बिहार सरकार ने एक फैसला लिया है. इस फैसले के अनुसार अब FPO यानी किसान उत्पाद संगठन भी किसानों को खाद- बीज और खेती से जुड़े उत्पाद बेच सकेगा. बिहार में इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया गया है. बिहार के सहकारिता विभाग ने ये जानकारी दी कि अब तक राज्य में करीब तीन सौ एफपीओ को चिह्नित करके उनका रजिस्ट्रेशन किया गया है. खास बात ये है कि चयनित एफपीओ अपना व्यापार बढ़ा सकें, इसके लिए उन्हें जिस बैंक गारंटी की जरूरत पड़ेगी वो बिहार सरकार खुद उठाएगी. हालांकि ये फैसला अभी विभाग के स्तर पर ही लिया गया है जिसे जल्दी ही मंजूरी के लिए बिहार कैबिनेट के पास भेजा जाना है.

क्या काम करता है FPO?

FPO यानी Farmers Product Organization.हिन्दी में इसे किसान उत्पाद संगठन भी बोलते हैं. ये संगठन दरअसल किसानों का ही एक ग्रुप है जो एक खास क्षेत्र में फसल उत्पादन समेत तमाम और गतिविधियां चलाता है. इन संगठनों क जरिए किसान ही किसान की मदद करते हैं. जैसे किसान फसल को कहाँ बेचेंगे, फसल में कोई बीमारी लग गई तो क्या करें? और ये सब काम जब किसान FPO के जरिए एक समूह में करते हैं तो आसानी हो जाती है. इतना ही नहीं, FPO के माध्यम से अगर किसान खाद, उर्वरक या बीज भी खरीदते हैं तो उन्हें छूट भी मिलती है. और अब बिहार सरकार ने FPO को ये जिम्मेदारी देने का फैसला किया है कि वो होने वाली फसल की प्रोसेसिंग करके मार्केट में बेच भी सकते हैं. जाहिर है जब छोटे छोटे समूहों में किसान स्वयं ही अपनी फसल बेच पाने में सक्षम होंगे तो यह उनकी व्यक्तिगत आय में तो इजाफा करेगा ही, साथ में बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.

क्या है उद्देश्य?

इसके जरिए सरकार चाहती है कि बीज और खाद से जुड़ी किसानों की समस्याएं किसान स्थानीय स्तर पर ही कर सकें. छोटे- छोटे समूहों में बँटकर अगर किसान बीज और खाद एक साथ खरीदेंगे या बेचेंगे तो फसल में आने वाली समस्याएं भी कॉमन होंगी जिसका निराकरण वह सामूहिक तौर पर खोज सकेंगे.

बिहार के सहकारिता विभाग ने बताया है कि प्रदेश भर में फैले FPOs की मदद से ग्रामीण इलाकों के बाजार आपस में जोड़े जाएंगे. इसके अलावा अगर किसानों को फोन पर सहयोग या परामर्श की जरूरत हो, फसल बीमा के बारे में कुछ जानना हो या ई-पशु चिकित्सा, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान योजनाओं की जानकारी लेनी हो – ये सारे काम एफपीओ के माध्यम से किए जाएंगे.

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