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तकनीक से तरक्की

खेती से कमाई की नई मिसाल, खंडवा के किसान रविंद्र यादव की कहानी

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किसान रविंद्र यादव ने मेहनत और तकनीक से खेती को मुनाफे का बिज़नेस बना दिया है।ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत और उत्पादन दोगुना हुआ।वे अरबी और अदरक जैसी फसलों से सालाना 20–25

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Pooja Rai· Correspondent

21 अक्टूबर 2025· 4 min read

agribusinessagriculture newsDrip irrigation
खेती से कमाई की नई मिसाल, खंडवा के किसान रविंद्र यादव की कहानी

खेती से कमाई की नई मिसाल, खंडवा के किसान रविंद्र यादव की कहानी

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किसान रविंद्र यादव ने मेहनत और तकनीक से खेती को मुनाफे का बिज़नेस बना दिया है।ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत और उत्पादन दोगुना हुआ।वे अरबी और अदरक जैसी फसलों से सालाना 20–25 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

कहते हैं अगर इरादा मजबूत हो तो खेती भी किसी बिज़नेस से कम नहीं।मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के बोरगांव के किसान रविंद्र यादव इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।पढ़ाई ज़्यादा नहीं की, लेकिन मेहनत और समझदारी से खेती को इतना ऊँचा मुकाम दिया कि आज सालाना 20–25 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

विरासत में मिली ज़मीन, बनाई अपनी पहचान
रविंद्र यादव के पिता खेती करते थे। अरबी और कपास उगाते थे।पिता के निधन के बाद रविंद्र और उनके भाई ने 25 एकड़ जमीन पर खेती की ज़िम्मेदारी संभाली।आज यही ज़मीन उनकी पहचान बन चुकी है।वो अरबी, अदरक, कपास, सोयाबीन, गेहूं और मक्का की खेती करते हैं और सालभर फसल सर्कुलेशन अपनाते हैं, ताकि उत्पादन भी बढ़िया मिले और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे।

कम पानी वाले इलाके में ड्रिप इरीगेशन से बढ़ाई पैदावार
खंडवा का इलाका कम बारिश और गिरते ग्राउंडवॉटर लेवल की वजह से खेती के लिए चुनौतीभरा है।लेकिन रविंद्र ने इस चुनौती को टेक्नोलॉजी से मौका बना लिया।उन्होंने 15 साल पहले जैन इरिगेशन की ड्रिप सिस्टम लगाई और नतीजा शानदार मिला।

“अरबी में ड्रिप लगाई तो दो महीने में फसल तंदुरुस्त हो गई। पानी की बचत हुई, बिजली कम लगी और उत्पादन डबल हो गया।” – रविंद्र यादव

अरबी की खेती: कम लागत, ज़्यादा मुनाफा
रविंद्र की सबसे मुनाफ़े वाली फसल है अरबी । इसकी बुवाई वे नवंबर में करते हैं।खेत में पहले 5 ट्रैक्टर गोबर खाद डालते हैं और 10 क्विंटल बीज लगाते हैं। पौधों की दूरी 8–10 इंच रखी जाती है ताकि कंद अच्छे से विकसित हों।एक एकड़ में लगभग 60–70 हजार रुपये की लागत आती है और 100–125 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है।बाजार भाव ₹20 प्रति किलो हो तो 2–3 लाख रुपये तक की कमाई आराम से हो जाती है।

“अरबी में बेड बनाकर लगाना फायदेमंद है। बारिश में पानी की निकासी हो जाती है और सड़न नहीं होती।” – रविंद्र यादव

अदरक की खेती: मेहनत का सोना बनता है मुनाफा
अदरक रविंद्र की दूसरी मुख्य फसल है।इसकी बुवाई वे मई-जून में करते हैं और फसल जनवरी तक तैयार होती है।खेत की तैयारी में वे गहरी जुताई करते हैं, 5 ट्रैक्टर गोबर खाद डालते हैं और बीज (कंद) को फंगीसाइड ट्रीटमेंट देकर सुरक्षित करते हैं।बेड से बेड की दूरी 4.5 फीट, और कंद से कंद की दूरी 12 इंच रखी जाती है।एक एकड़ में करीब 1 लाख रुपये की लागत और 2–3 लाख रुपये तक की आमदनी होती है।मध्य प्रदेश की जलवायु के मुताबिक वे ‘माहिम वैरायटी’ लगाते हैं, जिसमें एक पौधे से 1 से 1.5 किलो तक गठानें बन जाती हैं।

“अदरक में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन मुनाफा उससे भी ज्यादा होता है। पिछले साल मैंने 1 लाख की लागत में 6–7 लाख रुपये का फायदा कमाया।” – रविंद्र यादव

फसल सर्कुलेशन से सालभर मुनाफा
रविंद्र यादव खेती में फसल रोटेशन को जरूरी मानते हैं।उनका मानना है कि अदरक, अरबी, कपास, गेहूं, सोयाबीन और मक्का को बारी-बारी से लगाने से मिट्टी का पोषण बना रहता है और उत्पादन भी बढ़ता है।

“सालभर की मेहनत से हम 20–25 लाख रुपये की फसल बेच लेते हैं, लागत निकालने के बाद।” – रविंद्र यादव

तकनीक, अनुभव और जुनून का मेल
रविंद्र कहते हैं कि खेती में तरक्की के लिए अब सिर्फ मेहनत नहीं, टेक्नोलॉजी और समझदारी दोनों जरूरी हैं।ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और फर्टिगेशन से उन्होंने खेती को एक लाभदायक बिजनेस मॉडल बना दिया है।उनके बड़े भाई भी खेती में साथ हैं, और दोनों मिलकर बोरगांव के युवाओं को खेती अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।

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