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हिमाचल के बाद अब पुणे के व्यापारियों और आम लोगों ने तुर्की सेब का किया बहिष्कार

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान को खुला समर्थन दिए जाने के बाद हिमाचल के बाद पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब बहिष्कार करने का फैसला किया है।

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Pooja Rai·Correspondent·14 May 2025· 3 min read

हिमाचल के बाद अब पुणे के व्यापारियों और आम लोगों ने तुर्की सेब का किया बहिष्कार

हिमाचल के बाद अब पुणे के व्यापारियों और आम लोगों ने तुर्की सेब का किया बहिष्कार

पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान को खुला समर्थन दिए जाने के बाद हिमाचल के बाद पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब आयात का बहिष्कार करने का फैसला किया है। पुणे के व्यापारियों का कहना है कि इसके बजाय, वे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीद रहे हैं।

इस बहिष्कार का पुणे के फल बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि तुर्की के सेब आमतौर पर ₹1,000 करोड़ से ₹1,200 करोड़ तक के मौसमी कारोबार में योगदान करते हैं। पुणे में कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) बाजार में सेब व्यापारी सुयोग ज़ेंडे ने हाल ही में तुर्की सेब की मांग में भारी गिरावट की पुष्टि की है।

वहीं हिमाचल के हरीश चौहान (संयोजक, हिल्स स्टेट हॉर्टिकल्चर फोरम) भारत सरकार और भारतीय व्यापारियों दोनों से इस व्यापार को रोकने और भारतीय किसानों के साथ खड़े होने की अपील करते हुए कहा कि "हम तुर्की से सेब के आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं, जिससे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है।"
उन्होंने बताया कि 2023 में भारत ने तुर्की से 1.7 लाख मीट्रिक टन सस्ते सेब आयात किए, जिससे स्थानीय उपज की कीमतों को नुकसान पहुंचा। तुर्की के भूकंप के दौरान भारत के बिना शर्त समर्थन के बावजूद, तुर्की ने लगातार पाकिस्तान का समर्थन किया और भारत विरोधी रुख अपनाया। यहां तक ​​कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी।

ये भी पढ़ें - कृषि मंत्री ने छत्तीसगढ़ में कृषि व ग्रामीण विकास की प्रगति की समीक्षा की, किसानों की आय वृद्धि समेत इन विषयों पर भी चर्चा की

आम नागरिक भी कर रहे हैं बहिष्कार
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुणे में व्यापारियों ने तुर्की के सेबों का बहिष्कार करके निर्णायक कार्रवाई की है, जिसके कारण स्थानीय बाजारों से सेब गायब हो गए हैं. नागरिक भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं, तुर्की के आयात के बजाय अन्य स्रोतों से सेब खरीदना पसंद कर रहे हैं. बहिष्कार से शहर के फल बाजार पर काफी असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि तुर्की के सेब आमतौर पर 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये के मौसमी कारोबार में योगदान करते हैं.

व्यापारियों का कहना है कि यह कदम केवल वित्तीय निर्णय नहीं है, बल्कि सशस्त्र बलों और सरकार के साथ एकजुटता का प्रदर्शन है. पुणे में कृषि उपज बाजार समिति (APMC) बाजार में सेब व्यापारी सुयोग झेंडे ने हाल के दिनों में तुर्की के सेबों की मांग में भारी गिरावट की पुष्टि की। उन्होंने मंगलवार को कहा कि हमने तुर्की से सेब खरीदना बंद करने का फैसला किया है और इसके बजाय हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीदने का विकल्प चुना है। यह निर्णय हमारे देशभक्ति के कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्थन के अनुरूप है।

भारत पर छोड़े गए सैकड़ों ड्रोन मेड इन तुर्की
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान में बढ़े तनाव और एयर स्ट्राइक के बीच तुर्की ने पाकिस्तान की मदद की। भारत पर छोड़े गए सैकड़ों ड्रोन मेड इन तुर्किए थे। इसके बाद से ही पूरे देश में तुर्की को लेकर लोगों में गुस्सा है। लोगों का कहना है कि, भूकंप के दौरान हमने उस देश की बहुत मदद की थी, लेकिन अभी तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन पाकिस्तान की मदद करके ये बता दिया, वो हमारा दोस्त नहीं है, और अब भारत दुश्मन के दोस्तों को ऐसे आर्थिक चोट देगा.

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