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हरियाणा में जैविक उत्पादों के लिए दो मंडियां बनाई जाएंगी, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 20 हजार रुपये भी दिए जाएंगे: मुख्यमंत्री सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गुरुग्राम और हिसार में प्राकृतिक और जैविक मंडियों की स्थापना की घोषणा की है. गुरुग्राम मंडी में ग

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Pooja Rai· Correspondent

6 जून 2025· 3 min read

हरियाणा में जैविक उत्पादों के लिए दो मंडियां बनाई जाएंगी, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 20 हजार रुपये भी दिए जाएंगे: मुख्यमंत्री सैनी

हरियाणा में जैविक उत्पादों के लिए दो मंडियां बनाई जाएंगी, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 20 हजार रुपये भी दिए जाएंगे: मुख्यमंत्री सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गुरुग्राम और हिसार में प्राकृतिक और जैविक मंडियों की स्थापना की घोषणा की है. गुरुग्राम मंडी में गेहूं, धान और दालों जैसे उत्पादों की आपूर्ति होगी, जबकि हिसार मंडी में प्राकृतिक और जैविक तरीकों से उगाए गए फलों और सब्जियों पर ध्यान दिया जाएगा.

केंद्र सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है. प्राकृतिक खेती के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं. लेकिन अभी तक सभी किसानों के मन में यही सवाल उठ रहा था कि किसान प्राकृतिक खेती कर तो लें, लेकिन उनकी उपज कौन खरीदेगा क्योंकि अलग से इसकी कोई व्यवस्था नहीं है. अब हरियाणा सरकार ने इसका उपाय ढूंढ लिया है। राज्य की सैनी सरकार ने ऐलान किया कि हिसार और गुरुग्राम में जैविक मंडियां बनेंगी जहां किसान अपने प्राकृतिक उपजों को बेच सकेंगे. अलावा किसानों को प्राकृतिक उपजों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 20 हजार रुपये भी दिए जाएंगे.

प्रयोगशालाएं भी बनाई जाएंगी
मुख्यमंत्री गुरुवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती से प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए प्रति किसान 20 हजार रुपये दिए जाएंगे. उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती की उपज की जांच के लिए प्रयोगशालाएं भी बनाई जाएंगी. ये प्रयोगशालाएं किसानों की फसल की निःशुल्क जांच करेंगी.

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भूमिहीन किसानों के लिए ये कहा
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि खंड पूंडरी, जिला कैथल में कृषि विभाग की 53 एकड़ भूमि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को नीलामी के आधार पर पट्टे पर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि हर एक पंचायत में पंचायती भूमि में से 10 प्रतिशत भूमि या कम से कम एक एकड़ भूमि प्राकृतिक खेती के लिए आरक्षित की जाएगी. यह भूमि केवल भूमिहीन किसानों को नीलामी के माध्यम से दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकारी और पंचायती जमीन पर जो भी किसान प्राकृतिक खेती करेगा, उन किसानों को भी प्राकृतिक खेती योजना के तहत वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में कच्चे माल के भंडारण और संस्करण के लिए चार ड्रम की खरीद के लिए 3 हजार रुपये प्रति किसान दिया जाएगा. एक देसी गाय की खरीद पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाएगी.

2022 में शुरू की गई थी प्राकृतिक खेती योजना
सैनी ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना का शुभारंभ किया गया और इसमें लगभग 97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया और इसे हर साल लगातार बढ़ाया जा रहा है. प्राकृतिक खेती के लिए सरकार ने पोर्टल भी शुरू किया है. अब तक इस पोर्टल पर लगभग 1,84,665 किसानों ने 2,73,955 एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है. इसमें से, 17,087 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 10,550 किसानों का वेरिफिकेशन भी किया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में एक लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के अधीन लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं.

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