Skip to content
News Potli
एग्री बुलेटिन

सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत 3,40,000 टन तुअर खरीदी

मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकार ने 13 अप्रैल तक 3,40,000 टन तुअर की खरीद की है, जिसमें कर्नाटक सबसे आगे है। घरेलू कीमतों में उछाल के कारण चना की खरीद धीमी बनी हुई है, जबकि मसूर और मूंग की खरीद क्रमशः

NP

Pooja Rai· Correspondent

18 अप्रैल 2025· 2 min read

सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत 3,40,000 टन तुअर खरीदी

सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत 3,40,000 टन तुअर खरीदी

मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकार ने 13 अप्रैल तक 3,40,000 टन तुअर की खरीद की है, जिसमें कर्नाटक सबसे आगे है। घरेलू कीमतों में उछाल के कारण चना की खरीद धीमी बनी हुई है, जबकि मसूर और मूंग की खरीद क्रमशः 28,700 और 3,000 टन तक पहुंच गई है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने इस साल मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत अब तक 3,40,000 टन तुअर (अरहर) की खरीद की है। इस योजना के तहत तुअर की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जा रही है। मंत्रालय ने नौ राज्यों से 13.22 लाख टन तुअर खरीद को मंजूरी दी है।

कर्नाटक से सबसे ज़्यादा खरीद
सरकार का लक्ष्य खुले बाजार में तुअर की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 10 लाख टन तुअर का बफर स्टॉक बनाए रखना है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 13 अप्रैल तक तुअर की खरीद 3,40,000 टन तक पहुंच गई है।
कर्नाटक ने 1,30,000 टन खरीद में सबसे बड़ा योगदान दिया है, जहां किसानों को 7,550 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से ऊपर 450 रुपये प्रति क्विंटल का राज्य बोनस मिला है।अन्य योगदान देने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

ये भी पढ़ें - पंजाब में समय से 20 दिन पहले धान की बुआई के फैसले पर कृषि वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, मान सरकार को लिखा पत्र

चना की खरीद
सरकार ने मुख्य रूप से तेलंगाना और मध्य प्रदेश से 17,000 टन चना भी खरीदा है। 27 लाख टन चना खरीद की मंजूरी के बावजूद, खरीद धीमी बनी हुई है क्योंकि घरेलू कीमतें 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के बाद 5,650 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से अधिक हो गई हैं।

मसूर की खरीद
13 अप्रैल तक मसूर की खरीद 28,700 टन और मूंग (हरा चना) की खरीद 3,000 टन तक पहुँच गई है। पीएसएस तब लागू होता है जब कुछ कृषि वस्तुओं के बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे गिर जाते हैं। बजट 2025 में सरकार ने दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 2028-29 तक केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से राज्य उत्पादन के सापेक्ष अरहर, मसूर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है। हाल के वर्षों में घरेलू उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, भारत घरेलू दालों की आपूर्ति में कमी को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।

ये देखें-

NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min