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रोजगार की गारंटी, पारदर्शिता की व्यवस्था: गांवों को नई ताकत देगा वीबी–जी राम जी

विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार, ग्राम सभा की भागीदारी और पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी। इसका मकसद गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और रो

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Pooja Rai·Correspondent·20 Dec 2025· 5 min read

रोजगार की गारंटी, पारदर्शिता की व्यवस्था: गांवों को नई ताकत देगा वीबी–जी राम जी

रोजगार की गारंटी, पारदर्शिता की व्यवस्था: गांवों को नई ताकत देगा वीबी–जी राम जी

विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार, ग्राम सभा की भागीदारी और पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी। इसका मकसद गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार व्यवस्था की पुरानी कमियों को दूर करना है।

संसद से पारित विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी–जी राम जी बिल कानून बनने के बाद गांवों को विकास का केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह बिल ग्रामीण रोजगार व्यवस्था की पुरानी कमियों को दूर करने की कोशिश है। कृषि मंत्री ने कहा कि अब तक स्थिति यह थी कि काम अक्सर कागज़ों में दिखता था, लेकिन मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी नहीं मिलती थी। कहीं भ्रष्टाचार था, कहीं व्यवस्था कमजोर थी और कहीं भुगतान में देरी होती थी। इसी वजह से गरीब मजदूरों को उनका हक नहीं मिल पाता था। लेकिन यह कानून इन सभी कमियों को दूर करेगा।

यह विकसित भारत दिशा में एक बड़ा कदम
महात्मा गांधी ने भी कहा था कि असली भारत गांवों में बसता है। जब तक गांव विकसित नहीं होंगे, तब तक विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गांवों को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। यह नया कानून उसी दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

पुरानी योजनाओं की कमियां दूर करने की कोशिश
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में अलग-अलग सरकारों ने ग्रामीण रोजगार की गारंटी देने के लिए प्रयास किए। मनरेगा भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि अच्छी योजनाओं के बावजूद गांवों में गरीब मजदूरों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया। नई व्यवस्था में मनरेगा के दौरान सामने आई कमियों को दूर किया जाएगा। इसलिए इस कानून को बिना किसी पूर्वाग्रह के, खुले मन से पढ़ने और समझने की जरूरत है।

अब रोजगार की मजबूत कानूनी गारंटी
मंत्री ने बताया कि इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की और मजबूत सुरक्षा दी गई है।
जैसे धारा 5(1) के अनुसार अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन की जगह 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी और अगर 15 दिन के भीतर काम नहीं मिला, तो मजदूर को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

गांव की जरूरत के हिसाब से होंगे काम
इस बिल में धारा 4(2) और अनुसूची के तहत कामों को चार मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है।जैसे पानी की सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण ढांचा, आजीविका से जुड़ा ढांचा और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के काम । इन कामों से गांवों में स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।वहीं धारा 4(1) से 4(3) तक साफ किया गया है कि कौन-सा काम होगा, इसका फैसला ग्राम सभा करेगी। यानी गांव खुद तय करेगा कि उसे क्या चाहिए। ऊपर से कोई आदेश थोपे जाने की व्यवस्था नहीं है।

ये भी पढ़ें - कृषि बजट बढ़ाने की सिफारिश, किसानों के हित में संसदीय समिति की पहल

तकनीक से पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक
शिवराज सिंह ने बताया कि पहले अलग-अलग विभाग अपने-अपने तरीके से काम करते थे, जिससे तालमेल की कमी रहती थी। अब सभी कामों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जोड़ा जाएगा। इससे योजना बनाना, काम करना और निगरानी—all कुछ एक साथ और साफ तरीके से हो सकेगा। इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। इसके साथ ही पंचायतों और ग्राम सभा की भूमिका मजबूत होगी । इसमें धारा 16, 17, 18 और 19 के तहत पंचायतों, कार्यक्रम अधिकारियों और जिला अधिकारियों को योजना बनाने, लागू करने और निगरानी का अधिकार दिया गया है। वहीं धारा 20 ग्राम सभा की सामाजिक निगरानी को मजबूत करती है। गांव के लोग खुद देखेंगे कि काम सही हो रहा है या नहीं। तकनीक के जरिए जवाबदेही और मजबूत होगी।

खेती के मौसम में मजदूरों की कमी नहीं होगी
मंत्री चौहान ने बताया कि एक चिंता यह जताई जा रही थी कि अगर सारे मजदूर सरकारी कामों में लग गए तो खेती कैसे होगी। इसका समाधान धारा 6 में दिया गया है।राज्य सरकारें साल में 60 दिन तक इस योजना के तहत काम रोक सकती हैं।ये दिन पहले से घोषित करने होंगे। जबकि धारा 6(3) के तहत जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर अलग-अलग तारीखें तय की जा सकती हैं, ताकि खेती पर असर न पड़े।

बजट का बंटवारा होगा पूरी तरह पारदर्शी
मंत्री ने बताया कि धारा 4(5) और धारा 22(4) के अनुसार राज्यों को मिलने वाला बजट तय मानकों के आधार पर बांटा जाएगा।जहां ज्यादा जरूरत होगी और ज्यादा काम होगा, वहीं ज्यादा पैसा जाएगा। इसमें किसी तरह की मनमानी या भेदभाव की गुंजाइश नहीं होगी। यह नया बिल ग्रामीण रोजगार को सिर्फ काम देने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और टिकाऊ विकास की राह पर ले जाने का प्रयास करता है। रोजगार, पारदर्शिता, जवाबदेही और गांव की भागीदारी—इन चार स्तंभों पर खड़ा यह कानून गांवों को सच मायनों में विकास का इंजन बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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