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रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर, 2 जनवरी तक कुल बुवाई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर

इस रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और रकबा पिछले साल से ज्यादा हो गया है। किसानों ने बेहतर कीमत की उम्मीद में गेहूं को प्राथमिकता दी है। अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस साल गेहूं समे

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Pooja Rai· Correspondent

6 जनवरी 2026· 3 min read

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रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर, 2 जनवरी तक कुल बुवाई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर

रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर, 2 जनवरी तक कुल बुवाई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर

इस रबी सीजन में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और रकबा पिछले साल से ज्यादा हो गया है। किसानों ने बेहतर कीमत की उम्मीद में गेहूं को प्राथमिकता दी है। अगर मौसम अनुकूल रहा तो इस साल गेहूं समेत रबी फसलों का उत्पादन रिकॉर्ड हो सकता है।

इस रबी सीजन में देश में गेहूं की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। किसानों ने इस बार गेहूं को ज्यादा तरजीह दी है, क्योंकि दूसरी कई फसलों के दाम कमजोर चल रहे हैं। अगर आने वाले 2–3 महीने तक मौसम अनुकूल बना रहता है, तो भारत एक बार फिर रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन कर सकता है। इससे गेहूं निर्यात पर लगा चार साल पुराना प्रतिबंध हटने की संभावना भी बन सकती है।

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जनवरी तक गेहूं की बुवाई 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर से करीब 2 प्रतिशत ज्यादा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी कुछ जगह देर से बुवाई हो रही है, इसलिए सीजन के अंत तक गेहूं का रकबा 335–336 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।

कुल बुवाई 634.14 लाख हेक्टेयर
आंकड़ों के मुताबिक, 2 जनवरी तक सभी फसलों की कुल बुवाई 634.14 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 617.74 लाख हेक्टेयर थी। बीते एक हफ्ते में करीब 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। फिलहाल कुल बुवाई सीजन के सामान्य औसत (पिछले 5 साल का औसत 637.81 लाख हेक्टेयर) से थोड़ी कम है, जिसे 9 जनवरी तक पूरा होने की उम्मीद है।

दलहन फसलों का रकबा बढ़कर 134.30 लाख हेक्टेयर
दलहन फसलों की बात करें तो इनका रकबा बढ़कर 134.30 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल से 2.6 प्रतिशत ज्यादा है।चना की बुवाई 95.88 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल से 5.1 प्रतिशत अधिक है।मसूर की बुवाई 17.06 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के लगभग बराबर है।26 दिसंबर के बाद से चना और मसूर के रकबे में कोई बदलाव नहीं हुआ है।तिलहन फसलों की बुवाई भी बढ़ी है। इनका कुल रकबा 96.30 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से 3.3 प्रतिशत ज्यादा है।इसमें सरसों की बुवाई 89.36 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल की तुलना में 3.2 प्रतिशत अधिक है।

ये भी पढ़ें - भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक, चीन को छोड़ा पीछे

गेहूं की फसल पर IIWBR की सलाह
करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) ने कहा है कि अभी का मौसम गेहूं की बढ़वार के लिए अच्छा है। हालांकि, संस्थान ने किसानों को पीली (येलो) रस्ट बीमारी पर नजर रखने की सलाह दी है।किसानों से कहा गया है कि वे अपनी फसल की नियमित जांच करें और अगर पत्तियों में पीला पड़ना दिखे तो विशेषज्ञों से सलाह लें, क्योंकि यह बीमारी के अलावा किसी और कारण से भी हो सकता है। जरूरत पड़ने पर सुझाए गए कीटनाशक सही मात्रा में छिड़कने की सलाह दी गई है।

रबी सीजन का उत्पादन लक्ष्य
सरकार ने इस रबी सीजन के लिए कुल 171.14 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें गेहूं: 119 मिलियन टन, चावल: 15.86 मिलियन टन, दलहन: 16.57 मिलियन टन, मोटे अनाज: 3.17 मिलियन टन, मक्का: 14.5 मिलियन टन, जौ: 2.05 मिलियन टन, तिलहन: 15.07 मिलियन टन (जिसमें सरसों 13.9 मिलियन टन) शामिल हैं। पिछले साल देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 169.17 मिलियन टन रहा था।

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