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रबी फसलों की बुवाई में तेजी, इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद

देश में इस बार जल्दी बुवाई और ठंड की समय पर शुरुआत से कुल रबी क्षेत्र 10% बढ़ गया है। गेहूं, जौ, दालें, मोटे अनाज और सरसों सभी फसलों की बुवाई पिछले साल से ज्यादा है। गेहूं की बुवाई में 17% और जौ में 5

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Pooja Rai·Correspondent·18 Nov 2025· 3 min read

रबी फसलों की बुवाई में तेजी, इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद

रबी फसलों की बुवाई में तेजी, इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद

देश में इस बार जल्दी बुवाई और ठंड की समय पर शुरुआत से कुल रबी क्षेत्र 10% बढ़ गया है। गेहूं, जौ, दालें, मोटे अनाज और सरसों सभी फसलों की बुवाई पिछले साल से ज्यादा है। गेहूं की बुवाई में 17% और जौ में 50% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सरकार ने इस साल 171 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन लक्ष्य रखा है। मौसम की मदद और बढ़ी हुई बुवाई से किसानों को इस बार बेहतर पैदावार की उम्मीद है।

भारत में इस साल रबी सीजन की शुरुआत काफी मजबूत रही है। जल्दी बुवाई और उत्तर भारत में ठंड की समय से पहले शुरुआत ने फसलों के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है। इसका असर बुवाई के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। 14 नवंबर तक देश में कुल रबी फसलों की बुवाई 208.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल इसी समय 188.73 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस बार रबी क्षेत्र में लगभग 10.3% बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

कुल रबी 27% ज्यादा
जौ की बुवाई में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है, जो पिछले साल की तुलना में 50% अधिक है। कुल रबी क्षेत्र 7 नवंबर तक भी 27% ज्यादा था, जो इस बार के मजबूत रबी रुझान को दर्शाता है। पिछले वर्ष रबी मौसम में कुल बुवाई 663.04 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 167.22 मिलियन टन रहा था। इस बार सरकार ने 171.14 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसमें 119 मिलियन टन गेहूं, 15.86 मिलियन टन चावल, 16.57 मिलियन टन दालें और 15.07 मिलियन टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य शामिल है।

गेहूं की बुवाई तेजी पर, विशेषज्ञों ने दिए जरूरी निर्देश
14 नवंबर तक गेहूं की बुवाई 66.23 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जो पिछले साल से 17% ज्यादा है। कर्नाल स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ली रिसर्च (IIWBR) ने किसानों को सलाह दी है कि वे नवंबर महीने में बुवाई कर रहे हैं तो इसे 20 नवंबर तक पूरा कर लें। अक्टूबर में गेहूं बो चुके किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई और पहली सिंचाई 20–25 दिन के भीतर करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है और बीमारी का खतरा कम होता है।

ये भी पढ़ें - नवंबर–दिसंबर में यूरिया-DAP की बढ़ती मांग, सरकार के सामने आपूर्ति की चुनौती

दालों, मोटे अनाज और तिलहन के क्षेत्र में भी बढ़ोतरी
इस सीजन में दालों की बुवाई भी बढ़ी है। चना (ग्राम) की बुवाई 10% बढ़कर 37.43 लाख हेक्टेयर और मसूर की बुवाई 12.2% बढ़कर 6.83 लाख हेक्टेयर हो गई है। मोटे अनाज जैसे जौ, ज्वार और मक्का का क्षेत्र भी बढ़ा है। रबी पaddy की बुवाई 7.44 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल से 9.2% ज्यादा है। मक्का की बुवाई में 17.4% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

सरसों की बुवाई सबसे आगे, तेलहन क्षेत्र 5% बढ़ा
तेलहन फसलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल तिलहन क्षेत्र 66.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 5.2% अधिक है। इनमें सरसों का क्षेत्र सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। इस बार सरसों की बुवाई 64.23 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो 6% की बढ़त दर्शाती है।

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