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यूरिया के दुरुपयोग और कालाबाजारी पर हो कार्रवाई, केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए केवल प्रमाणित 600 बायोस्टिमुलेंट बेचने के निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों के साथ दिल्ली में एक अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें निगरानी करें कि यूरिया का खेती के अलावा कहीं

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Pooja Rai·Correspondent·15 Aug 2025· 4 min read

यूरिया के दुरुपयोग और कालाबाजारी पर हो कार्रवाई, केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए केवल प्रमाणित 600 बायोस्टिमुलेंट बेचने के निर्देश

यूरिया के दुरुपयोग और कालाबाजारी पर हो कार्रवाई, केंद्रीय कृषि मंत्री ने दिए केवल प्रमाणित 600 बायोस्टिमुलेंट बेचने के निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों के साथ दिल्ली में एक अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें निगरानी करें कि यूरिया का खेती के अलावा कहीं और दुरुपयोग ना हो। अगर यूरिया-खाद की कालाबाजारी का संदेह हो तो, राज्य सरकारें कार्रवाई करें।कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभी तक प्रमाणित 600 बायोस्टुमिलेंट ही किसानों को बेचे जाएं।

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री ने नकली खाद और उर्वरक की समस्या को एक बार फिर उजागर किया और राज्य सरकारों से इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि करीब 30 हजार जैव उत्तेजक उत्पाद बिक रहे थे। जिनमें से अत्याधिक प्रमाणित नहीं थे। अब-तक मात्र 600 बायोस्टुमिलेंट प्रमाणित पाए गए हैं। इसलिए अधिकारी अब ये सुनिश्चित करें कि यह प्रमाणित बायोस्टुमिलेंट ही किसानों तक पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई खाद के साथ कुछ और दवाई जबरदस्ती बेचता है, तो यह भी गलत है। जिसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने राज्यों से भी इस संबंध में कठोर कदम उठाने के लिए कहा।

कृषि मंत्रियों ने जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं की जानकारी दी
बैठक में कृषि मंत्रियों ने जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं के बारे में केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी। राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा , उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना, बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कर्नाटक के कृषि मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी, उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित गुजरात के कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल और पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुद्डियन के प्रतिनिधियों की तरफ से अतिरिक्त यूरिया की मांग की गई। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्रियों ने केंद्रीय मंत्री को यूरिया की कमी के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान की भी जानकारी दी साथ ही अतिरिक्त सहायता राशि की आवश्यकता जताई।

यूरिया की अतिरिक्त मांग की दो मुख्य वजह क्या है?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूरिया की अतिरिक्त मांग की मुख्य दो वजह हो सकती हैं, पहला – अच्छी बारिश के कारण चावल और मक्के सहित बुआई में बढ़ोतरी और दूसरा कारण हो सकता है यूरिया का गैर खेती के कामों में अनुचित इस्तेमाल। उन्होंने कहा कि यदि खेती की आवश्यकता के लिए यूरिया की मांग है तो निश्चित रूप से यूरिया उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसके लिए तत्परता से मंत्रालय में काम चल रहा है। लेकिन यदि यूरिया के गलत इस्तेमाल की आशंका है तो यह एक गंभीर विषय है, जिस संबंध में सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने राज्य के कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि यूरिया का सही इस्तेमाल ही हो। इस संबंध में निगरानी समितियों का गठन करते हुए तंत्र मजबूत करें।

ये भी पढ़ें - 3 अक्टूबर को विजय पर्व के साथ शुरू होगा रबी फसल के लिए “विकसित कृषि संकल्प अभियान’

अगले 5 साल की कृषि कार्य योजना हो तय
केंद्रीय मंत्री चौहान ने अधिकारियों से प्रगतिशील किसानों, विशेषज्ञों एवं अन्य उपयोगी सुझावों को जोड़ते हुए अगले 5 साल की कृषि कार्य योजना की रूपरेखा तय करने का भी निर्देश दिया।साथ ही जनकल्याण समस्याओं के लिए मंत्रालय के ट्रोल फी नंबर को अधिक से अधिक प्रसारित करने के भी निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति पर हुई चर्चा
चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित करने में जुटी है। डिजिटल भुगतान के माध्यम से किसानों तक बीमा की राशि पहुंचे, यह सुनिश्चित हो रहा है। यदि बीमा कंपनी या राज्य सरकारों की तरफ से बीमा क्लेम देने में देरी होती है, तो अतिरिक्त 12 प्रतिशत ब्याज सीधे किसानों के खातों में देना होगा।

अंत में, कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री के स्वदेशी अपनाने के आह्वान को दोहराया और कहा कि किसी भी हालत में कृषि क्षेत्र और देशवासियों के हितों के साथ समझौता नहीं होने दिया जाएगा। किसान भाई- बहनों के साथ पशुपालकों और मछुआरों के हित भी सुरक्षित रखे जाएंगे। कृषि विकास के लिए सरकार कटिबद्ध है।

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