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महाराष्ट्र: किसान-मजदूर-आदिवासी एकजुट, सीपीएम ने 40 हजार लोगों के साथ निकाला पैदल मार्च

ठाणे–पालघर से माकपा का लॉन्ग मार्च शुरू हुआ, जिसमें करीब 40 हजार किसान और आदिवासी शामिल हैं। यह मार्च वनाधिकार कानून के अमल, बंदर परियोजनाओं के विरोध, रोजगार गारंटी कानून में बदलाव और स्मार्ट मीटर के

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Pooja Rai· Correspondent

19 जनवरी 2026· 2 min read

CharotiCPMmaharashtra farmer
महाराष्ट्र: किसान-मजदूर-आदिवासी एकजुट, सीपीएम ने 40 हजार लोगों के साथ निकाला पैदल मार्च

महाराष्ट्र: किसान-मजदूर-आदिवासी एकजुट, सीपीएम ने 40 हजार लोगों के साथ निकाला पैदल मार्च

सीपीएम ने चारोटी से पालघर तक करीब 40 हजार लोगों का पैदल मार्च शुरू किया है। वनाधिकार कानून, मनरेगा, स्मार्ट मीटर और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए मांगें पूरी न होने तक पालघर कलेक्टर कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना देने का ऐलान किया गया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) की ओर से पालघर जिले में एक भव्य और ऐतिहासिक पैदल मार्च शुरू किया गया है। जिले के सभी तालुकों से आए करीब 40 हजार किसान, मजदूर और आदिवासी इस मार्च में शामिल हुए हैं। यह मार्च डहाणू तालुका के चारोटी से शुरू हुआ है। मार्च करने वाले आज रात मनोर में रुकेंगे और अगले दिन पालघर जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचेंगे।

सीपीएम और सहयोगी संगठनों ने साफ किया है कि जब तक सरकार उनकी लंबित और अहम मांगों को लिखित रूप में तय समय-सीमा के साथ स्वीकार नहीं करती, तब तक पालघर कलेक्टर कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन किया जाएगा।

कई जनसंगठनों की बड़ी भागीदारी
इस पैदल मार्च में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), सीटू (CITU), अखिल भारतीय जनवादी महिला संगठन (AIDWA), डीवाईएफआई (DYFI), एसएफआई (SFI) और आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच (AARM) जैसे कई जनसंगठनों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया है।मार्च का नेतृत्व डॉ. अशोक ढवले, मरियम ढवले, डॉ. अजित नवले, विनोद निकोले और किरण गहला जैसे नेता कर रहे हैं।कल इस मार्च में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव विजू कृष्णन भी शामिल होंगे।

ये भी पढ़ें - फसल से सेहत तक: क्यों भारत को अब मिट्टी बचाने की ज़रूरत है?

आंदोलन की मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं—

वनाधिकार कानून को सख्ती से लागू किया जाए

सरकारी और अन्य जमीन पर खेती करने वालों को जमीन का हक मिले

रद्द की गई मनरेगा योजना को फिर से शुरू किया जाए

स्मार्ट मीटर योजना वापस ली जाए

पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए

चार श्रम संहिताएं रद्द की जाएं

बढ़वण और मुरबे जैसे बंदरगाह प्रोजेक्ट रद्द हों

पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिले

शिक्षा, रोजगार, राशन और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं

जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन
सीपीएम का यह मार्च सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत जनआंदोलन के रूप में देखा जा रहा है। इस आंदोलन से पूरे पालघर जिले में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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