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मधुमक्खी परागण से फसल की पैदावार औसतन 20-30% तक बढ़ सकती है, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक

विश्व मधुमक्खी दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है जो आज के दिन, 20 मई को पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और जैवविविधता के के लिए मधुमक्खियों और अन्य pollinators के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये मनाया

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Pooja Rai·Correspondent·20 May 2025· 3 min read

मधुमक्खी परागण से फसल की पैदावार औसतन 20-30% तक बढ़ सकती है, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक

मधुमक्खी परागण से फसल की पैदावार औसतन 20-30% तक बढ़ सकती है, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक

मधुमक्खी कितनी प्यारी तुम, मेहनत से न डरती हो तुम।
फूलों से रस चूस-चूस कर, कितना मीठा शहद बनाती।
भांति-भांति के फूलों पर तुम, सुबह-सवेरे ही मंडराती।
वैद्य और विद्वान तुम्हारे, मधु के गुण गाते हैं सारे।
ख़ुद न चखती खाती हो तुम, मधुमक्खी मुझे भाती हो तुम।
कवि दीनदयाल शर्मा की यह कविता हमें बताती है कि मधुमक्खियाँ हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण हैं।

विश्व मधुमक्खी दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है जो आज के दिन, 20 मई को पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और जैवविविधता के के लिए मधुमक्खियों और अन्य pollinators के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये मनाया जाता है। स्लोवेनिया के आधुनिक मधुमक्खी पालन के अग्रदूत एंटोन जानसा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में इस तारीख को चुना गया था। स्लोवेनिया के एक प्रस्ताव और 115 देशों के समर्थन के बाद UN ने वर्ष 2017 में विश्व मधुमक्खी दिवस घोषित किया।

ये भी पढ़ें - बीटी कॉटन की ऐसे बुवाई करें किसान, राजस्थान के किसानों को कृषि अधिकारियों ने दी सलाह

मधुमक्खियाँ हम सबके लिए क्यों जरूरी हैं?
1.मधुमक्खियाँ कई पौधों और जंतुओं के अस्तित्त्व के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये विश्व की लगभग एक-तिहाई फसलों और 90% वन्य पुष्पीय पौधों को परागित करती हैं।
2.ये शहद, मोम, प्रोपोलिस और अन्य मूल्यवान उत्पादों का भी उत्पादन करती हैं जिनके पोषणीय, औषधीय और आर्थिक लाभ हैं।
3.मधुमक्खियाँ पौधों को तेज़ी से एवं स्वस्थ रूप से बढ़ने में मदद करती हैं, जिससे उनके कार्बन ग्रहण और भंडारण क्षमता में वृद्धि होती है। मधुमक्खियाँ रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों की आवश्यकता को भी कम करती हैं, जो कि वातावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं।
4.ये पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की संकेतक भी हैं, क्योंकि ये पर्यावरणीय परिवर्तनों, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आवास हानि तथा कीटनाशकों के प्रति प्रतिक्रिया देती हैं।
5.ये विभिन्न फसलों जैसे फलों, सब्जियों, तिलहन, दालों आदि में परागण के द्वारा इनकी उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
6.यह अनुमान लगाया गया है कि मधुमक्खी परागण से फसल की पैदावार औसतन 20-30% तक बढ़ सकती है।
7.यह शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पाद जैसे मोम, प्रोपोलिस आदि का उत्पादन करके ग्रामीण परिवारों के लिये आय और रोज़गार के अवसर सृजित करने में सहायक है।
8.शहद एक उच्च मूल्य वाला उत्पाद है जिसकी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में अत्यधिक मांग है। यह उपभोक्ताओं के लिये पोषण तथा स्वास्थ्य का स्रोत भी है।

मधुमक्खियों को संरक्षित करने के लिए क्या करें?

बालकनी, छतों और बगीचों में सजावट के लिए गेंदा या सूरजमुखी जैसे रस युक्त फूल लगाएं

अपने नजदीकी स्थानीय मधुमक्खी पालक से शहद और अन्य उत्पाद खरीदें

बच्चों और किशोरों के बीच मधुमक्खियों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाएं और मधुमक्खी पालकों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करें

पुराने घास के मैदानों को संरक्षित करें, जिनमें विविध प्रकार के फूल होते हैं, तथा अमृत युक्त पौधे लगाएं

ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग करें जो मधुमक्खियों को नुकसान न पहुंचाएं, तथा उन्हें हवा रहित मौसम में, या तो सुबह जल्दी या देर रात को, जब मधुमक्खियां फूलों से हट जाती हैं, छिड़काव करें।

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