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मक्के की फसल में Fall Armyworm कीट का बढ़ा खतरा, हिमाचल के किसानों के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

कृषि विभाग के मुताबिक हिमाचल के ऊना, मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा और चंबा जिले में मक्‍का की फसल पर फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप देखने को मिल रहा है.फॉल आर्मीवर्म एक बेहद विनाशकारी कीट है जो मक्के की पूरी फसल को

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Pooja Rai·Correspondent·29 Jul 2025· 3 min read

मक्के की फसल में Fall Armyworm कीट का बढ़ा खतरा, हिमाचल के किसानों के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

मक्के की फसल में Fall Armyworm कीट का बढ़ा खतरा, हिमाचल के किसानों के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

कृषि विभाग के मुताबिक हिमाचल के ऊना, मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा और चंबा जिले में मक्‍का की फसल पर फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप देखने को मिल रहा है.फॉल आर्मीवर्म एक बेहद विनाशकारी कीट है जो मक्के की पूरी फसल को नष्‍ट कर देता है.

हिमाचल कृषि विभाग के अनुसार 22 जुलाई तक, ऊना में इस कीट का संक्रमण लगभग 15 प्रतिशत, हमीरपुर में 10-12 फीसदी, कांगड़ा के निचले इलाकों में 12 प्रतिशत, चंबा में 10 प्रतिशत और मंडी जिले के कुछ इलाकों में 8 से 10 फीसदी तक दर्ज किया गया था. इस संक्रमण से बचने के लिए कृषि विभाग की तरफ से खास एडवाइजरी जारी की गई है.

फॉल आर्मीवर्म एक बेहद विनाशकारी कीट है जो मक्के की पूरी फसल को नष्‍ट कर देता है. इसके लार्वा मक्के की पत्तियों, गुच्छों और बालियों को खाते हैं, जिससे उपज में भारी नुकसान होता है. यह पौधे के टिश्यू में छेद करके तनों को खोखला कर देता है और बहुत ज्‍यादा नुकसान पहुंचाता है. सबसे पहले इस कीट के बारे में साल 2018 में कर्नाटक में इसकी जानकारी मिली थी. इसके बाद 2019 में हिमाचल प्रदेश के वैज्ञानिकों ने इसकी सूचना दी.

10 प्रतिशत से कम प्रकोप होने पर क्या करें?
कृषि विभाग के मुताबिक किसानों को अपने खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और अगर कीटों का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम है, तो रासायनिक छिड़काव की जरूरत नहीं है. ऐसे मामलों में, नीम के अर्क या प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूलेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है. जैविक कीटनाशक भी प्रभावी हो सकते हैं. हालांकि, अगर प्रकोप 10 प्रतिशत से ज्‍यादा है, तो क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल या इमामेक्टिन बेंजोएट (4 मिली प्रति 10 लीटर पानी) जैसे रासायनिक छिड़काव का इस्तेमाल करना चाहिए.

ये भी पढ़ें - किसानों की आय दोगुनी कर रहे हैं, MSP भी बढ़ा रहे हैं और KCC पर सस्ता ऋण भी उपलब्ध करा रहे हैं’ लोकसभा में बोले चौहान

अगली बुवाई से पहले ये ज़रूर करें किसान
किसानों को अगले बुवाई के मौसम के लिए गहरी जुताई करने और मिट्टी को कुछ समय के लिए सीधी धूप में रखने की सलाह दी गई है. साथ ही खेत की सफाई, खरपतवार नियंत्रण और लोबिया या नेपियर घास जैसी जरूरी अवरोधक फसलों के प्रयोग जैसी अच्छी कृषि पद्धतियों का भी पालन करने के लिए कहा गया है. किसानों को दालों के साथ अंतर-फसल लगाने की भी सलाह दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि विषय विशेषज्ञ (एसएमएस), कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) और कृषि विस्तार अधिकारी (एईओ) की समर्पित टीमें तैनात की गई हैं और वे गांवों में सक्रिय रूप से क्षेत्रीय निगरानी कर रही हैं.

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