Skip to content
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
News Potli
  • खेती किसानी
  • एग्री बुलेटिन
  • मौसम बेमौसम
  • पशुपालन
  • साक्षात्कार
  • बाज़ार
  • ग्राउन्ड रिपोर्ट्स
  • कमाई वाली बात
सहयोग करें
Share
WhatsAppFacebookX / Twitter
  1. Home
  2. एग्री बुलेटिन
  3. बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री
एग्री बुलेटिन

बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को पारंपरिक सब्जियों के विलुप्त होते बीजों के संरक्षण और उन्हें फिर से किसानों तक पहुंचाने के असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्मश्री

NP

Pooja Rai· Correspondent

26 जनवरी 2026· 3 min read

agriculture newsFarmer Raghupat Singhkheti kisani
बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को पारंपरिक सब्जियों के विलुप्त होते बीजों के संरक्षण और उन्हें फिर से किसानों तक पहुंचाने के असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है। रघुपत सिंह ने बीज संरक्षण को अपने जीवन का मिशन बनाया और 55 से अधिक विलुप्त सब्जियों के बीज बचाकर तीन लाख से ज्यादा किसानों को उनसे जोड़ा।

खेती सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और विरासत की रखवाली भी है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ग्राम समथल के किसान रघुपत सिंह ने इसी सोच को अपने जीवन का मिशन बना लिया था। जब ज़्यादातर किसान बाजार की मांग के पीछे बढ़ रहे थे, तब उन्होंने उन पारंपरिक सब्जियों के बीजों को बचाने का रास्ता चुना, जो धीरे-धीरे खेतों और थालियों से गायब हो रहे थे। विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित कर उन्हें फिर से किसानों तक पहुंचाने वाले इस समर्पित किसान को भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है।

यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस सोच को मिला है, जिसने बीज संरक्षण को खेती से आगे बढ़कर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़ दिया। पद्मश्री की घोषणा के बाद से समाथल गांव सहित पूरे जिले में किसानों के बीच खुशी और गर्व का माहौल है।

साधारण किसान, असाधारण काम
रघुपत सिंह का निधन 1 जुलाई 2025 को 85 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद हो गया था। वे खुद को हमेशा एक साधारण किसान ही मानते रहे, लेकिन उनका काम असाधारण था। करीब 35 साल पहले उन्होंने महसूस किया कि कई पारंपरिक सब्जियां धीरे-धीरे खेतों और थालियों से गायब होती जा रही हैं। यहीं से उनके जीवन का उद्देश्य तय हो गया विलुप्त होती सब्जियों के बीजों को बचाना और उन्हें फिर से खेतों तक पहुंचाना।

बीज संरक्षण को बनाया मिशन
रघुपत सिंह ने अपने खेतों में बीजों को संरक्षित किया और उन्हें मुफ्त या बेहद कम लागत पर किसानों को उपलब्ध कराया। अपने जीवनकाल में उन्होंने 55 से अधिक विलुप्त सब्जियों के बीज संरक्षित किए और तीन लाख से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक और नवाचारी खेती से जोड़ा। दालों से लेकर सब्जियों तक उन्होंने 100 से अधिक नई प्रजातियां विकसित कीं।

ये भी पढ़ें - गाजीपुर से पूसा तक: बासमती को नई पहचान दिलाने वाले डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म सम्मान

अनोखी सब्जियां बनी पहचान
सात फीट लंबी लौकी, आम जैसे स्वाद वाला अदरक और ढाई फुट लंबी सेम जैसी अनोखी सब्जियां उनकी पहचान बन गईं। देश के कई कृषि वैज्ञानिक और शोध संस्थान उनके काम को नजदीक से देखते और सराहते रहे।

परिवार को मिली औपचारिक सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक रघुपत सिंह के बेटे सोमवीर सिंह ने बताया कि रविवार को दिल्ली से फोन आया, जिसमें उनके पिता को पद्मश्री सम्मान देने की औपचारिक जानकारी दी गई। अधिकारियों ने उनकी मां प्रेमवती का हालचाल भी जाना और पुरस्कार ग्रहण करने के लिए परिवार को आमंत्रित किए जाने की बात कही।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
कृषि क्षेत्र में नवाचारों के लिए रघुपत सिंह को जीवनकाल में 11 राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके प्रयासों की सराहना कर चुके हैं। अब पद्मश्री सम्मान के साथ उनकी साधना और संघर्ष को राष्ट्रीय पहचान मिल गई है।
रघुपत सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण है कि बीज बचाना सिर्फ खेती नहीं, बल्कि देश और भविष्य को बचाने का काम है।

ये देखें -

News Potli.
Clip & Share
“

— बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

newspotli.comIndia's #1 Rural Journalism Platform
NP

About the Author

Pooja Rai

Correspondent

सभी लेख देखें
Related Coverage

और पढ़ें.

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!
एग्री बुलेटिन

ILDC कॉन्फ्रेंस 2025: कृषि की चुनौतियों में किरायेदार किसान, कैसे मिले सुरक्षा और अधिकार!

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां एक व्यापक किसान वर्ग कृषि पर आश्रित है। इस किसान वर्ग में एक बड़ी आबादी किरायेदार किसानों की भी है। इन किरायेदार किसानों को असलियत में किसान नहीं माना जाता है। इस स्थ

Pooja Rai·28 फ़र॰ 2026·9 min
भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?
एग्री बुलेटिन

भारत-अमेरिका डील के बाद GM फसलों पर क्यों बढ़ी बहस?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों को लेकर बहस तेज हो गई है। भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क देने की सहमति दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि संवेदनश

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·3 min
राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद
एग्री बुलेटिन

राष्ट्रीय दलहन क्रांति: बिहार को दलहन खेती बढ़ाने के लिए 93.75 करोड़ की मदद

सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ब

Pooja Rai·9 फ़र॰ 2026·2 min
News Potli

न्यूज़ पोटली

भारत के गाँव और किसान की आवाज़

Platform

  • About Us
  • Our Team
  • Pitch Your Story
  • Privacy Policy
  • Terms of Service

Contact Us

© 2026 News Potli. All rights reserved.

Crafted byBuildRocket LabsBuildRocket Labs